छठ पूजा 2026

छठ पूजा 2026 - तिथि और समय

दिनतिथिअनुष्ठान
दिन 122 अक्टूबर 2026 (गुरु)नहाय-खाय (कद्दू-भात)
दिन 223 अक्टूबर 2026 (शुक्र)खरना (खीर-रोटी, रात्रि व्रत आरंभ)
दिन 324 अक्टूबर 2026 (शनि)संध्या अर्घ्य (सायं ~5:30-6:00 बजे)
दिन 425 अक्टूबर 2026 (रवि)उगते सूर्य को अर्घ्य (सुबह ~6:15-6:30)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठ पूजा 2026 की तारीखें क्या हैं?

छठ पूजा 2026 की पूर्ण कार्यक्रम: नहाय-खाय: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी). खरना/लोहंडा: 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार, पंचमी). संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को): 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार, षष्ठी). उगते सूर्य को अर्घ्य और व्रत समाप्ति: 25 अक्टूबर 2026 (रविवार, सप्तमी सूर्योदय).

छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य का समय क्या है?

छठ पूजा 2026 में संध्या अर्घ्य का समय: 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को सूर्यास्त से लगभग 30-45 मिनट पहले घाट पर पहुंचें। अक्टूबर में भारत में सूर्यास्त लगभग शाम 6:00 बजे होता है (स्थानीय समय भिन्न हो सकता है)। शुभ अर्घ्य समय: शाम 5:30 से सूर्यास्त तक। स्थानीय पंचांग से सटीक सूर्यास्त का समय जांचें।

छठ पूजा 2026 में उगते सूर्य को अर्घ्य का समय क्या है?

छठ पूजा 2026 में उगते सूर्य को अर्घ्य: 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) को सूर्योदय से पहले घाट पर पहुंचें। अक्टूबर में भारत में सूर्योदय लगभग सुबह 6:15-6:30 बजे होता है। शुभ अर्घ्य समय: सूर्योदय से 15-20 मिनट पहले पानी में खड़े हो जाएं। व्रत खोलने का समय: उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद प्रसाद ग्रहण करके व्रत तोड़ें।

छठ पूजा 2026 में ठेकुआ कैसे बनाएं?

छठ प्रसाद ठेकुआ बनाने की विधि: सामग्री: 2 कप गेहूं का आटा, 1 कप गुड़ (या चीनी), 3-4 बड़े चम्मच देसी घी, इलायची, सौंफ, अदरक (स्वाद के लिए)। विधि: गुड़ को थोड़े पानी में गर्म करके चाशनी बनाएं। ठंडी होने पर आटे में मिलाएं। घी और मसाले मिलाकर सख्त आटा गूंधें। छोटी-छोटी लोई बनाकर सांचे या हाथ से आकार दें। घी में सुनहरा भूरा होने तक तलें।

छठ पूजा में क्या-क्या नहीं खाना चाहिए?

छठ पूजा व्रत नियम: नहाय-खाय (पहले दिन) के बाद से: लहसुन और प्याज सख्त वर्जित। खरना के बाद से व्रत पारण तक: कुछ भी नहीं खाते (निर्जला व्रत, पानी भी नहीं). मसाले: नमक और हल्दी भी नहीं। व्रत के दौरान बिस्तर पर नहीं सोते (जमीन पर सोते हैं)। घर में मांस-मदिरा पूरी तरह वर्जित। पूरे घर में सात्विकता और शुद्धि रखी जाती है।

छठ 2026 में पटना छठ घाट पर क्या व्यवस्था होगी?

पटना (बिहार) भारत में छठ पूजा का सबसे बड़ा केंद्र है। गंगा नदी के घाट (कंकड़बाग, बांकीपुर घाट आदि) पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं। बिहार सरकार हर वर्ष घाटों की विशेष सफाई, रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था करती है। 2026 में भी पटना में विशेष व्यवस्था की उम्मीद है। दिल्ली के यमुना घाट पर भी लाखों बिहारी-उत्तर प्रदेशी प्रवासी छठ मनाते हैं।

छठ पूजा के बाद व्रत कैसे तोड़ें?

छठ व्रत पारण (व्रत तोड़ना): 25 अक्टूबर 2026 की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद: प्रसाद ग्रहण: ठेकुआ और फल से व्रत तोड़ें। परिवार को प्रसाद बांटें। धीरे-धीरे खाना शुरू करें: 36+ घंटे के उपवास के बाद सबसे पहले हल्का खाना (फल, खिचड़ी) खाएं। तुरंत भारी और तैलीय भोजन न करें। पानी पिएं: निर्जला उपवास के बाद धीरे-धीरे पानी और नींबू पानी पिएं।

छठ पूजा में सूप (बांस की टोकरी) का क्या महत्व है?

छठ पूजा में बांस की बनी टोकरी (सूप) का विशेष महत्व है: यह प्रसाद रखने का पवित्र पात्र है। सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना, और अन्य प्रसाद सजाकर घाट ले जाते हैं। बांस को पवित्र माना जाता है और प्लास्टिक की टोकरी का उपयोग वर्जित है। अर्घ्य के समय सूप को पानी में डुबोकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। परिवार के हर सदस्य के लिए अलग सूप की परंपरा है।

छठ गीत कौन से हैं?

छठ के प्रमुख लोकगीत: 'केलवा जे फरेला घवद से, ओह पर सुगा मेड़राय': यह सबसे लोकप्रिय छठ गीत है। 'उगो हे सूरज देव भइल अरगियाके बेर': उगते सूर्य को अर्घ्य के समय गाया जाता है। 'हो दीनानाथ': सूर्य देव की महिमा का गीत। 'सेविले छठी मैया': छठी माई की वंदना। ये गीत भोजपुरी और मैथिली में हैं। छठ पूजा के समय इन गीतों की आवाज घाटों पर गूंजती है।