देव उठनी एकादशी 2026: 22 नवंबर, तुलसी विवाह, चातुर्मास समाप्ति
देव उठनी एकादशी 2026: 22 नवंबर 2026 को भगवान विष्णु चार महीने की चातुर्मास योगनिद्रा से जागते हैं। प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। विवाह निषेध समाप्त। तुलसी विवाह इसी दिन। विवाह मुहूर्त 23 नवंबर 2026 से फिर शुरू।
देव उठनी एकादशी 2026 मुख्य तथ्य
- तिथि: 22 नवंबर 2026
- अन्य नाम: प्रबोधिनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी, कार्तिक शुक्ल एकादशी
- माह: कार्तिक शुक्ल एकादशी
- चातुर्मास समाप्ति: 22 नवंबर 2026
- चातुर्मास शुरू हुआ था: 17 जुलाई 2026 (देव शयनी एकादशी)
- विवाह मुहूर्त फिर से: 23 नवंबर 2026 से
- तुलसी विवाह: 22 नवंबर (मुख्य दिन) से 29-30 नवंबर (कार्तिक पूर्णिमा) तक
- मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
देव उठनी एकादशी 2026 कब है?
देव उठनी एकादशी 2026: 22 नवंबर 2026। इसे प्रबोधिनी एकादशी, देव प्रबोधिनी एकादशी और कार्तिक शुक्ल एकादशी भी कहते हैं। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष एकादशी (11वीं तिथि)। यह वह एकादशी है जब भगवान विष्णु चातुर्मास की योगनिद्रा (17 जुलाई 2026 से) से जागते हैं। इस दिन सभी शुभ कार्य - विशेष रूप से हिंदू विवाह - फिर शुरू हो जाते हैं। 22-23 नवंबर 2026 से 2026 के अंत के लिए विवाह मुहूर्त खुलते हैं।
देव उठनी एकादशी 2026 पर क्या होता है?
22 नवंबर 2026 देव उठनी एकादशी की प्रमुख घटनाएं: 1. विष्णु जागरण: भगवान विष्णु चार महीने की चातुर्मास योगनिद्रा से जागते हैं। ब्रह्मांडीय व्यवस्था पुनः स्थापित। 2. चातुर्मास समाप्ति: 17 जुलाई 2026 से शुरू तपस्या और विवाह निषेध समाप्त। 3. तुलसी विवाह: देव उठनी का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान - तुलसी पौधे (वृंदा देवी) का शालिग्राम (विष्णु/कृष्ण स्वरूप) से विवाह। 4. विवाह मुहूर्त: 23 नवंबर 2026 से हिंदू विवाह मुहूर्त पुनः प्रारंभ। 5. शुभ संस्कार: गृहप्रवेश, उपनयन और अन्य शुभ संस्कार फिर शुरू।
देव उठनी एकादशी 2026 पर तुलसी विवाह क्या है?
तुलसी विवाह 2026 (22 नवंबर): तुलसी पौधे (वृंदा देवी) का शालिग्राम (विष्णु/कृष्ण) से विधिपूर्वक विवाह। यह अनुष्ठान विष्णु के जागरण का प्रतीक है। विधि: 1. तुलसी को लाल विवाह साड़ी, गहने, चूड़ियों से सजाएं। 2. शालिग्राम को वर के रूप में पास रखें। 3. तुलसी को सिंदूर और मंगलसूत्र पहनाएं। 4. सप्तपदी, आरती, विष्णु मंत्र। 5. नारियल, गन्ना, आंवला, मौसमी फल का प्रसाद। महत्व: तुलसी विवाह करने से पुत्री विवाह का पुण्य, वंश दोष निवारण, लक्ष्मी का घर में वास।
देव उठनी एकादशी 2026 की पूजा विधि क्या है?
2026 देव उठनी एकादशी पूजा विधि: 1. व्रत: दशमी (21 नवंबर) शाम से। एकादशी (22 नवंबर) को अन्न रहित व्रत। पारण: द्वादशी (23 नवंबर) सूर्योदय बाद। 2. विष्णु पूजा: प्रातः स्नान, स्वच्छ वस्त्र, तुलसी पत्र, सफेद फूल, कपूर, चंदन, फल। 3. जागरण अनुष्ठान: शंख बजाकर विष्णु को जगाएं। मूर्ति या शालिग्राम को उत्सव के साथ उठाएं। 4. तुलसी विवाह। 5. रात्रि जागरण: कीर्तन और प्रार्थना। 6. मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", "ॐ नमः नारायणाय"। 7. दान: तिल, फल, वस्त्र।
देव उठनी एकादशी 2026 के बाद विवाह मुहूर्त कब खुलता है?
देव उठनी एकादशी 2026 और विवाह: चातुर्मास (17 जुलाई - 22 नवंबर 2026) में विष्णु योगनिद्रा में थे। विवाह के लिए दैवीय आशीर्वाद और विष्णु की उपस्थिति आवश्यक। 22 नवंबर 2026 देव उठनी एकादशी: विष्णु जागते हैं, दिव्य स्वीकृति बहाल, विवाह मुहूर्त 23 नवंबर से। "विवाह भीड़": जोड़े जो 4+ महीने रुके थे वे अब नवंबर-दिसंबर 2026 में विवाह करते हैं। पहले से बुकिंग करें: 23 नवंबर के बाद सप्ताहांत जल्दी भर जाते हैं। पंडित, हॉल, कैटरर 2-3 महीने पहले बुक करें।
देव उठनी एकादशी और तुलसी विवाह की तिथि कब तक होती है?
तुलसी विवाह 2026 तिथियां: देव उठनी एकादशी (22 नवंबर 2026) पर मुख्य दिन। द्वादशी (23 नवंबर 2026) भी व्यापक रूप से मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा (29-30 नवंबर 2026) अंतिम स्वीकार्य दिन। प्रतीकात्मक अर्थ: तुलसी विवाह मानसून और फसल काल का अंत और विवाह मौसम की शुरुआत दर्शाता है। परिवार में तुलसी विवाह पूर्ण होने के बाद घर "खुला" माना जाता है और सांसारिक विवाह निर्धारित किए जाते हैं।
देव उठनी एकादशी व्रत और पूजा के लाभ क्या हैं?
देव उठनी एकादशी 2026 व्रत-पूजा के लाभ: 1. विवाह आशीर्वाद: अविवाहित व्यक्ति जो व्रत और तुलसी विवाह करते हैं उन्हें शीघ्र और शुभ विवाह की मान्यता। 2. मनोकामना पूर्ति: विष्णु जागरण दिन इच्छाओं और प्रार्थनाओं के प्रकट होने के लिए अत्यंत शक्तिशाली। 3. पितृ आशीर्वाद: पितृ दोष निवारण। 4. धन-समृद्धि: तुलसी विवाह घर में लक्ष्मी (धन देवी) का वास। 5. आध्यात्मिक पुण्य: एकादशी व्रत और विष्णु पूजा अनेक सामान्य पूजाओं के समकक्ष पुण्य। 6. परिवार रक्षा: तुलसी विवाह परिवार को गंभीर रोग से बचाने की मान्यता।
देव उठनी एकादशी 2026 पर क्या नहीं करना चाहिए?
देव उठनी एकादशी 2026 निषेध: न खाएं: चावल, दाल, प्याज, लहसुन, मांस, शराब, अन्न (22 नवंबर)। शुभ कार्य विष्णु जागरण पूजा से पहले न शुरू करें। तुलसी पौधे वाले घर में तुलसी विवाह न छोड़ें - अशुभ। पारण (23 नवंबर सूर्योदय के बाद) से पहले व्रत न तोड़ें। बचें: दिन में नींद, निंदा, झगड़ा। करें: तुलसी विवाह, शंख बजाएं, विष्णु मंत्र, रात्रि कीर्तन, दान, ब्राह्मणों को तिल-नारियल-आंवला।
कार्तिक पूर्णिमा और देव उठनी एकादशी का क्या संबंध है?
देव उठनी एकादशी (22 नवंबर 2026) और कार्तिक पूर्णिमा (लगभग 29-30 नवंबर 2026): दोनों पवित्र कार्तिक माह में। देव उठनी (11वीं तिथि): विष्णु जागरण। कार्तिक पूर्णिमा (15वीं - पूर्णिमा): सबसे पवित्र पूर्ण चंद्रमाओं में से एक। 2026 कार्तिक पूर्णिमा = गुरु नानक जयंती (सिख उत्सव) + कार्तिगाई दीपम (दक्षिण भारत)। देव उठनी से कार्तिक पूर्णिमा (22-30 नवंबर 2026): विष्णु पूजा, दान और नए शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ अवधि। इस खिड़की में विवाह मुहूर्त अत्यधिक मांग में।
2026 में देव उठनी एकादशी का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
देव उठनी एकादशी 2026 ज्योतिषीय संदर्भ: कर्क में उच्च गुरु (जून 2027 तक)। मीन में शनि। कार्तिक शुक्ल एकादशी पर चंद्रमा। सबसे लाभान्वित राशियां (देव उठनी के बाद विवाह के लिए): कर्क: गुरु 1ले - असाधारण विवाह काल। मीन: गुरु 5वें (प्रेम, संतान)। कन्या: गुरु 11वें (लाभ)। मकर: गुरु 7वें (विवाह भाव पर सीधी दृष्टि)। साढ़ेसाती राशियां (मीन, कुंभ, मेष): शनि सक्रिय पर उच्च गुरु की कृपा से चिंता कम। समग्र संदेश: 23 नवंबर 2026 के बाद उच्च गुरु + चातुर्मास समाप्ति = 2026 के सर्वश्रेष्ठ विवाह मुहूर्त।