दिवाली 2026: तिथि, लक्ष्मी पूजन मुहूर्त और पंचदिवसीय उत्सव की पूरी जानकारी

दिवाली 2026 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। पांच दिवसीय दीपोत्सव 18 अक्टूबर (धनतेरस) से शुरू होकर 22 अक्टूबर (भाई दूज) तक चलेगा। जानें पूजा विधि, मुहूर्त और दीपावली से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।

दिवाली 2026 का कार्यक्रम

  • धनतेरस: 18 अक्टूबर 2026 (रविवार)
  • नरक चतुर्दशी/छोटी दिवाली: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार)
  • दीपावली (मुख्य): 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)
  • गोवर्धन पूजा: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
  • भाई दूज: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दिवाली 2026 कब है?

दिवाली 2026 में 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को मनाई जाएगी। यह कार्तिक कृष्ण अमावस्या को पड़ती है। दीपावली का पंचदिवसीय उत्सव 18 अक्टूबर (धनतेरस) से 22 अक्टूबर (भाई दूज) तक चलता है।

दिवाली 2026 में दीपावली के पांचों दिन कब हैं?

दिवाली 2026 का पंचदिवसीय कार्यक्रम: धनतेरस: 18 अक्टूबर 2026 (रविवार). छोटी दिवाली/नरक चतुर्दशी: 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार). दीपावली (मुख्य दिन): 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार). गोवर्धन पूजा: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार). भाई दूज: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार).

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?

दिवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त प्रदोष काल (संध्या काल) में होता है, जो आमतौर पर सूर्यास्त के बाद 1-2 घंटे का होता है। 20 अक्टूबर 2026 को शाम लगभग 6 बजे से रात 8 बजे के बीच मुहूर्त रहेगा। सटीक मुहूर्त आपके शहर के आधार पर अलग-अलग होगा। पंचांग के अनुसार निशित काल (मध्यरात्रि) मुहूर्त भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा कैसे करें?

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन विधि: पूजा स्थान को साफ करके फूलों और रंगोली से सजाएं। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश की स्थापना करें। पंचोपचार (गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य) से पूजन करें। लक्ष्मी मंत्र 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' का 108 बार जाप करें। खील-बताशे और मिठाई का भोग लगाएं। घर के हर कोने में दीपक जलाएं।

दिवाली पर घर की सफाई क्यों जरूरी है?

दिवाली से पहले घर की सफाई का विशेष महत्व है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ और व्यवस्थित घरों में विराजती हैं। घर की गहरी सफाई से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। पुरानी, टूटी-फूटी और अनावश्यक वस्तुओं को हटाना शुभ माना जाता है। सफाई के बाद चूने से रंगाई और गंगाजल छिड़ककर घर को पवित्र किया जाता है।

दिवाली 2026 पर पटाखे जलाने का समय क्या है?

दिवाली पर पटाखे जलाने के लिए सर्वोत्तम समय शाम 8 बजे से रात 10 बजे के बीच होता है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार, रात 10 बजे के बाद पटाखे जलाना वर्जित है। पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से हरित पटाखों का उपयोग करें जो कम प्रदूषण फैलाते हैं। बच्चों को पटाखों से दूर रखें और अग्निशामक यंत्र पास में रखें।

धनतेरस और दिवाली में क्या अंतर है?

धनतेरस और दिवाली दोनों दीपावली उत्सव के भाग हैं: धनतेरस (18 अक्टूबर 2026) दीपावली से दो दिन पहले कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को मनाया जाता है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। यमराज और धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) की पूजा की जाती है। दिवाली (20 अक्टूबर 2026) कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है और मां लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है।

दिवाली पर रंगोली क्यों बनाई जाती है?

दिवाली पर रंगोली बनाने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। रंगोली घर के मुख्य द्वार पर बनाई जाती है ताकि मां लक्ष्मी का स्वागत किया जा सके। रंगोली का शुभ रूप देखकर देवी-देवता घर में प्रवेश करते हैं। रंगीन रंगोली नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाती है। कमल के फूल, दीपक, और स्वास्तिक की रंगोली विशेष रूप से शुभ मानी जाती है। आटे, रंगीन पाउडर, फूलों की पंखुड़ियों और दीपों से रंगोली बनाई जाती है।

दिवाली का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है?

दिवाली का महत्व अनेक पवित्र घटनाओं से जुड़ा है। भगवान राम का वनवास से लौटना: 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण का अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया था। मां लक्ष्मी का प्राकट्य: समुद्र मंथन से कार्तिक अमावस्या को मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। पांडवों की वापसी: महाभारत में पांडवों के 12 वर्ष के वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद वापसी पर भी दीप जलाए गए थे।