एकादशी 2026: सभी एकादशी की तिथियां और व्रत विधि

एकादशी (11वीं तिथि) हिंदू पंचांग में भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तिथि है। प्रत्येक मास में दो एकादशी आती हैं (शुक्ल और कृष्ण पक्ष) जिससे वर्ष में 24 एकादशी होती हैं। 2026 में विशेष एकादशियां: निर्जला, देव शयनी, मोक्षदा और देव उठनी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में प्रमुख एकादशियां कौन सी हैं?

2026 की प्रमुख एकादशियां: मौनी एकादशी: 10 जनवरी 2026 (पौष कृष्ण, मौन व्रत)। विजया एकादशी: फरवरी 2026। आमलकी एकादशी: मार्च 2026 (फाल्गुन शुक्ल)। निर्जला एकादशी: 6 जून 2026 (सर्वश्रेष्ठ, निर्जला)। देव शयनी एकादशी: 17 जुलाई 2026 (चातुर्मास शुरू)। परिवर्तिनी एकादशी: सितंबर 2026। देव उठनी एकादशी: 22 नवंबर 2026 (चातुर्मास समाप्त)। मोक्षदा एकादशी: 8 दिसंबर 2026 (गीता जयंती)।

निर्जला एकादशी 2026 कब है?

निर्जला एकादशी 2026: 6 जून 2026 (शनिवार), ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी। यह सर्वश्रेष्ठ एकादशी है। 'निर्जला' अर्थात बिना पानी के। जो व्यक्ति वर्षभर की 24 एकादशियों का व्रत नहीं रख सकता, यदि वह एक बार निर्जला एकादशी का व्रत रखे तो उसे सभी 24 एकादशियों के व्रत का पुण्य मिलता है।

एकादशी व्रत की विधि क्या है?

एकादशी व्रत विधि: दशमी (10वीं तिथि): रात को हल्का सात्विक भोजन, मांसाहार और प्याज-लहसुन वर्जित। एकादशी (11वीं): सूर्योदय से पहले उठकर स्नान। व्रत संकल्प। दिनभर उपवास (फलाहार या निर्जला)। विष्णु पूजा: शालिग्राम या विष्णु मूर्ति को पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप। द्वादशी (12वीं): सूर्योदय के बाद पारण (व्रत खोलना)।

देव शयनी एकादशी 2026 का महत्व क्या है?

देव शयनी एकादशी 2026: 17 जुलाई 2026, आषाढ़ शुक्ल एकादशी। भगवान विष्णु आज से 4 माह की योग निद्रा में जाते हैं। चातुर्मास (4 पवित्र महीने) शुरू होते हैं। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक के महीनों में: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन स्थगित। इस एकादशी पर: विष्णु का पूजन, जागरण और 'हरि शयन' स्तोत्र पाठ।

देव उठनी एकादशी 2026 का महत्व क्या है?

देव उठनी एकादशी 2026: 22 नवंबर 2026, कार्तिक शुक्ल एकादशी। भगवान विष्णु योग निद्रा से जागते हैं। चातुर्मास समाप्त। विवाह और अन्य शुभ कार्य पुनः शुरू। तुलसी विवाह: देव उठनी के अगले दिन (23 नवंबर) तुलसी-शालिग्राम विवाह। इस एकादशी पर: 'हरि जागरण' स्तोत्र पाठ, शंख वादन, और विशेष पूजा।

एकादशी व्रत के नियम क्या हैं?

एकादशी व्रत के नियम: न खाएं: चावल, गेहूं की रोटी, दाल, अनाज। खाएं: फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, शकरकंद। पारण: अगले दिन (द्वादशी को) सूर्योदय के बाद, हरिवासर समाप्त होने पर। न करें: दूसरे के घर का भोजन, क्रोध, झूठ, जुआ, और मांसाहार। सोना: दिन में सोना वर्जित। तुलसी: एकादशी को तुलसी के पत्ते न तोड़ें।

मोक्षदा एकादशी 2026 का महत्व क्या है?

मोक्षदा एकादशी 2026: 8 दिसंबर 2026 (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी)। गीता जयंती के साथ मेल। मोक्षदा अर्थात मोक्ष देने वाली एकादशी। इस एकादशी के व्रत का पुण्य: पूर्वजों को मोक्ष दिलाने में सहायक। भगवद्गीता पाठ: इस दिन सम्पूर्ण गीता पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी। कुरुक्षेत्र में गीता जयंती का भव्य उत्सव।

एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?

एकादशी पर दान: तुलसी दल: भगवान विष्णु को सबसे प्रिय। फल: केला, आम, अनार दान। दूध और घी: ब्राह्मण को। वस्त्र: पीले या सफेद वस्त्र दान। दीपक: सरसों के तेल का दीपक मंदिर में। अनाज: चावल, दाल (लेकिन स्वयं न खाएं)। जल: पानी के घड़े का दान गर्मियों में विशेष पुण्यकारी। संकल्प: दान के समय विष्णु मंत्र का उच्चारण।

एकादशी के दिन क्या पूजा करें?

एकादशी पूजा विधि: प्रातःकाल: पंचामृत से विष्णु अभिषेक। तुलसी दल: विष्णु को अर्पित करें। मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' (108 बार)। विष्णु सहस्रनाम: पाठ करें या सुनें। शंख वादन: पूजा में शंख बजाएं। जागरण: रात में कीर्तन और भजन। अरती: सुबह और शाम भगवान की आरती। पारण: अगले दिन 'नारायण, नारायण' कहकर व्रत खोलें।