करवा चौथ 2026: तिथि, पूजा विधि, मेहंदी और चंद्रोदय समय
करवा चौथ 2026 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को है। यह निर्जला व्रत पत्नियां अपने पति की दीर्घायु के लिए रखती हैं। सूर्योदय से चंद्रोदय तक का यह व्रत पति-पत्नी के प्रेम का सबसे सुंदर उत्सव है।
करवा चौथ 2026 विवरण
- तिथि: 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार)
- हिंदी तिथि: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी
- व्रत: सूर्योदय से चंद्रोदय तक, निर्जला
- चंद्रोदय: लगभग रात 8-9 बजे (शहर अनुसार)
- सरगी समय: सूर्योदय से पहले, लगभग 4-5 बजे
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
करवा चौथ 2026 में कब है?
करवा चौथ 2026 में 7 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को है। यह कार्तिक कृष्ण चतुर्थी (अंधेरे पक्ष की चौथ) को पड़ती है। चंद्रोदय का समय लगभग रात 8-9 बजे के बीच होगा (शहर के अनुसार अलग)।
करवा चौथ व्रत कब से कब तक रहता है?
करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से पहले (सरगी खाने के बाद) प्रारंभ होता है और चंद्रोदय तक चलता है। 7 अक्टूबर 2026 को: सरगी का समय: लगभग सुबह 4-5 बजे (सूर्योदय से पहले). व्रत प्रारंभ: सूर्योदय के बाद. व्रत समापन: चंद्रमा के दर्शन और पति के हाथ से पानी पीने के बाद (रात लगभग 8-9 बजे). यह निर्जला व्रत है यानी दिन भर पानी भी नहीं पिया जाता।
करवा चौथ पर क्या खाना खाएं?
करवा चौथ पर सरगी में खाने योग्य चीजें: फेनी (सेवई), मठरी, गुझिया, फल (केला, सेब, संतरा), सूखे मेवे, मिठाई, दूध और दही. व्रत के दिन कुछ नहीं खाते. चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलते हैं तो शुरुआत पानी और मिठाई से करें, फिर हल्का भोजन करें।
करवा चौथ की पूजा विधि क्या है?
करवा चौथ पूजा विधि: थाली सजाएं: दीपक, छलनी, करवा (मिट्टी का घड़ा), मिठाई, फल, सिंदूर. शाम को एक जगह बैठकर करवा चौथ की कथा सुनें. सोलह श्रृंगार करें. महिलाएं एक-दूसरे को थाली दिखाएं. चांद निकलने पर छलनी से पहले चांद देखें, फिर पति का चेहरा देखें. पति अपनी पत्नी को पानी और मिठाई दें. पति-पत्नी एक-दूसरे को भोजन कराएं।
करवा चौथ का व्रत क्यों रखा जाता है?
करवा चौथ का व्रत विवाहित हिंदू महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए रखती हैं। इस व्रत की उत्पत्ति वीरावती की कथा से जुड़ी है जिन्होंने अपने पति की जान बचाने के लिए सच्चे मन से यह व्रत रखा था। सावित्री ने भी अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाया था। यह व्रत पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है।
करवा चौथ पर मेहंदी का महत्व क्या है?
करवा चौथ पर मेहंदी लगाना अनिवार्य परंपरा है। मेहंदी का रंग जितना गहरा हो, पति का प्रेम उतना गहरा माना जाता है। महिलाएं करवा चौथ से एक-दो दिन पहले मेहंदी लगवाती हैं ताकि रंग गहरा हो जाए। मेहंदी में पति का नाम छुपाने की परंपरा है और पति उसे खोजते हैं। मेहंदी के अलावा लाल चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर और करधनी भी करवा चौथ श्रृंगार का हिस्सा हैं।
क्या अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ व्रत रख सकती हैं?
हां, अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। वे मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं। प्रेमी जोड़े भी एक-दूसरे के लिए करवा चौथ व्रत रखते हैं। कुछ मामलों में पुरुष भी अपनी पत्नी के प्रति समर्पण दिखाते हुए व्रत रखते हैं।
करवा चौथ पर चांद क्यों देखते हैं?
करवा चौथ पर चांद देखने की परंपरा: चंद्रमा को शीतलता, समृद्धि और स्त्री शक्ति का प्रतीक माना जाता है। छलनी से पहले चांद देखने की परंपरा है क्योंकि छलनी की जाली से देखना भाग्य को छानकर देखने का प्रतीक है। चांद के दर्शन के बाद छलनी में से ही पति का चेहरा देखा जाता है और फिर व्रत खोला जाता है। यह पल पति-पत्नी के रिश्ते की मधुरता का प्रतीक है।
करवा चौथ की कथा क्या है?
करवा चौथ की मुख्य कथा वीरावती की है। राजा की बेटी वीरावती करवा चौथ के दिन निर्जला व्रत रख रही थी। शाम को उसे बहुत भूख-प्यास लगी तो भाइयों ने पेड़ की आड़ में दर्पण से नकली चांद दिखाया। वीरावती ने व्रत तोड़ा। इससे उसके पति की मृत्यु हो गई। वीरावती ने एक वर्ष तप किया और अगले करवा चौथ पर सच्चे मन से व्रत रखकर अपने पति को वापस पाया। इसलिए व्रत कभी झूठे चांद देखकर नहीं तोड़ना चाहिए।