मकर संक्रांति: उत्तरायण का पर्व
मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पवित्र पर्व है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है और शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है। तिल-गुड़ दान, पतंगबाजी, गंगा स्नान और खिचड़ी दान इस त्योहार की विशेषताएं हैं।
मकर संक्रांति - वर्षवार जानकारी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मकर संक्रांति क्या है?
मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर का वह पर्व है जो सूर्य के मकर राशि (Capricorn) में प्रवेश के दिन मनाया जाता है। यह एकमात्र हिंदू त्योहार है जो सौर कैलेंडर के आधार पर निर्धारित होता है, इसलिए हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को आता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है (उत्तर दिशा में गति करता है) और दिन बड़े होने लगते हैं।
मकर संक्रांति 2026 कब है?
मकर संक्रांति 2026 में 14 जनवरी 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी। सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। इसे विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है: पोंगल (तमिलनाडु), बिहू (असम), उत्तरायण (गुजरात), खिचड़ी (उत्तर प्रदेश, बिहार), मकर विलक्कु (केरल)।
मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते हैं?
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा मुख्यतः गुजरात और राजस्थान में है। इसके पीछे कारण: सर्दियों में सूर्य की उपयोगी किरणें: जनवरी में सुबह की धूप में निकलकर पतंग उड़ाने से शरीर को सूर्य की लाभदायक किरणें मिलती हैं (Vitamin D)। मकर संक्रांति उत्सव: पतंगों से आकाश रंगीन होता है जो उत्तरायण के उत्सव का प्रतीक है। गुजरात में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव (International Kite Festival) अहमदाबाद में होता है।
मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ क्यों खाते हैं?
मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ (या खिचड़ी) खाने और दान करने की परंपरा है। तिल और गुड़ सर्दियों में शरीर को गर्मी देते हैं। तिल में सेसमिन, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। गुड़ आयरन से भरपूर और पाचन के लिए लाभदायक है। महाराष्ट्र में 'तिळगुळ घ्या आणि गोड गोड बोला' (तिल-गुड़ लो और मीठी-मीठी बातें करो) का आदान-प्रदान होता है।
मकर संक्रांति पर गंगा स्नान का महत्व क्या है?
मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उत्तरायण का प्रारंभ: इस दिन सूर्य का उत्तरायण प्रारंभ होता है, जो देवताओं का दिन माना जाता है (दक्षिणायन देवताओं की रात है)। भीष्म पितामह: महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायण का इंतजार किया और इसी काल में प्राण त्यागे। प्रयागराज (इलाहाबाद) का माघ मेला मकर संक्रांति से शुरू होता है।
मकर संक्रांति को विभिन्न राज्यों में कैसे मनाते हैं?
क्षेत्रवार मकर संक्रांति उत्सव: उत्तर प्रदेश/बिहार: खिचड़ी (चावल-दाल) दान और खाना। तिल के लड्डू और चिवड़ा। गुजरात/राजस्थान: उत्तरायण पतंग महोत्सव। तिल के लड्डू और उंधियू (सब्जी)। तमिलनाडु: 4 दिन का पोंगल उत्सव। चावल, दूध और गुड़ से पोंगल पकाते हैं। असम: बिहू (माघ बिहू), पीठा और लारू मिठाई। महाराष्ट्र: तिळगुळ (तिल-गुड़) का आदान-प्रदान।
मकर संक्रांति पर क्या दान करें?
मकर संक्रांति पर दान: तिल का दान (सबसे पवित्र): सर्दियों में तिल का दान गर्मी और पोषण देता है। गुड़ का दान, खिचड़ी (चावल-दाल-घी) का दान। ऊनी कपड़े और कंबल का दान (सर्दियों में गरीबों के लिए)। गाय को तिल मिले चारे का भोग। पंचांग के अनुसार सोना, काली तिल, कंबल का दान मोक्षदायी माना जाता है। 'खिचड़ी दान' देश के कई हिस्सों में इस दिन की विशेष परंपरा है।
मकर संक्रांति और पोंगल में क्या अंतर है?
मकर संक्रांति और पोंगल दोनों एक ही ज्योतिषीय घटना (सूर्य का मकर में प्रवेश) पर आधारित हैं: मकर संक्रांति: उत्तर और मध्य भारत में (14 जनवरी), शीतकालीन फसल उत्सव, गंगा स्नान और तिल दान पर जोर। पोंगल: तमिलनाडु में 4 दिन का उत्सव (14-17 जनवरी), भोगी पोंगल, थाई पोंगल, मट्टू पोंगल, कानुम पोंगल। पोंगल का अर्थ है 'उफान आना' (चावल-दूध का बर्तन में उफान एक शुभ संकेत है)।
मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
मकर संक्रांति का ज्योतिषीय महत्व: सूर्य का मकर राशि में प्रवेश: शनि (मकर के स्वामी) और सूर्य (पिता) का एक साथ होना। उत्तरायण: सूर्य की उत्तरी गति शुरू होती है। भीष्म प्रतीक: उत्तरायण में प्राण त्यागना मोक्षदायी माना जाता है। महत्वपूर्ण 2026: 2026 में मकर संक्रांति के समय शनि कुंभ में और बृहस्पति मिथुन में होंगे। सूर्य का मकर प्रवेश 14 जनवरी 2026 की शाम या रात को होगा।