विवाह मुहूर्त 2026: शुभ शादी की तारीखें
2026 में विवाह के लिए सबसे शुभ काल है। बृहस्पति (विवाह का कारक) कर्क में उच्च का है जो सभी विवाह को विशेष आशीर्वाद देता है। चातुर्मास समाप्त होने के बाद 22 नवंबर 2026 से विवाह मुहूर्त का शुभारंभ होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 में विवाह मुहूर्त कब शुरू होंगे?
2026 में विवाह मुहूर्त का कार्यक्रम: बसंत विवाह सीजन: जनवरी 14 (मकर संक्रांति) से मई 2026 तक। चातुर्मास विराम: 17 जुलाई (देव शयनी एकादशी) से 22 नवंबर 2026 (देव उठनी एकादशी) तक विवाह मुहूर्त नहीं। शीतकाल सीजन: 22 नवंबर 2026 से 20 दिसंबर 2026। धनुर्मास: 21 दिसंबर 2026 से 14 जनवरी 2027 तक पुनः विराम।
नवंबर-दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त की तारीखें कौन सी हैं?
नवंबर-दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त (देव उठनी के बाद): नवंबर 22 (देव उठनी एकादशी, स्वयंसिद्ध), नवंबर 23 (तुलसी विवाह), नवंबर 25, 27, 28, 30। दिसंबर 3, 7, 10, 14, 17, 20 (धनुर्मास से पहले)। नोट: 21 दिसंबर से 14 जनवरी 2027 धनुर्मास में विवाह नहीं होते। सटीक लग्न मुहूर्त अपनी कुंडली के अनुसार ज्योतिषी से लें।
विवाह मुहूर्त में कौन से लग्न शुभ होते हैं?
विवाह के लिए शुभ लग्न: वृष लग्न (शुक्र का घर, अत्यंत शुभ), मिथुन, कन्या (बुध के घर), तुला (शुक्र का घर), धनु, मीन (बृहस्पति के घर)। टालें: वृश्चिक लग्न (8वीं राशि), मेष और सिंह (सूर्य/मंगल के एकांत घर)। लग्न में शुभ ग्रह (बृहस्पति, शुक्र) का होना श्रेष्ठ है। शनि, मंगल और राहु लग्न में अशुभ।
क्या 2026 में अक्षय तृतीया पर विवाह शुभ है?
हां, अक्षय तृतीया 2026 (21 अप्रैल) पर विवाह अत्यंत शुभ है। यह स्वयंसिद्ध मुहूर्त है, पंचांग दोष-रहित है। 2026 में इसका विशेष महत्व: बृहस्पति (विवाह का कारक) कर्क में उच्च का है और इसी समय उच्च का है। गणना के लिए किसी भी लग्न मुहूर्त में विवाह किया जा सकता है। देशभर में मंदिरों और विवाह भवनों में इस दिन सबसे अधिक विवाह होते हैं।
विवाह में पंचांग शुद्धि क्यों जरूरी है?
पंचांग शुद्धि का अर्थ है पांचों अंगों का शुभ होना: तिथि: 2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, 13 (सम और विषम की शुभ तिथियां), अमावस्या और अष्टमी वर्जित। वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार शुभ; शनिवार और मंगलवार आमतौर पर वर्जित। नक्षत्र: रोहिणी, मृगशीर्ष, मघा आदि। योग: विष्कुंभ, व्यतिपात, वज्र, शूल योग वर्जित। करण: विष्टि (भद्रा) करण वर्जित।
विवाह मुहूर्त में भद्रा का क्या असर होता है?
भद्रा (विष्टि करण) में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य वर्जित हैं। भद्रा आमतौर पर अष्टमी, त्रयोदशी, तृतीया, अष्टमी को पड़ती है। विशेष: रक्षाबंधन पर भद्रा का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, भद्रा काल के बाद ही राखी बांधनी चाहिए। किसी भी मुहूर्त में भद्रा का समय पंचांग से अवश्य जांचें।
2026 में गुरु ग्रह विवाह को कैसे प्रभावित करते हैं?
2026 में बृहस्पति (गुरु) कर्क राशि में उच्च के हैं। यह विवाह के लिए अत्यंत शुभ संयोग है क्योंकि: बृहस्पति विवाह का प्रमुख कारक ग्रह है। उच्च बृहस्पति वैवाहिक जीवन में सुख, संतान और समृद्धि देता है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर है, उनके लिए 2026 विवाह के लिए विशेष वरदान है। कर्क राशि के जातक: आपकी राशि में उच्च बृहस्पति, 2026 सर्वोत्तम विवाह वर्ष।
विवाह से पहले कुंडली मिलान क्यों करवाएं?
कुंडली मिलान (गुण मिलान) में 36 गुणों का परीक्षण होता है: वर्ण (1), वश्य (2), तारा (3), योनि (4), ग्रह मैत्री (5), गण (6), भकूट (7), नाडी (8)। न्यूनतम 18 गुण मिलने चाहिए। विशेष दोष: मांगलिक दोष, नाडी दोष, भकूट दोष जांचें। इसके अतिरिक्त: सप्तम भाव, सप्तमेश, और शुक्र की स्थिति की तुलना करें। दोनों की आयु सीमा, संतान योग, और आर्थिक स्थिति का भी मिलान करें।
क्या 2026 में विवाह के लिए कोई विशेष ग्रह योग है?
2026 में विवाह के लिए विशेष ग्रह योग: बृहस्पति कर्क में उच्च (जनवरी-दिसंबर 2026): सर्वोत्तम। शुक्र 6 सितंबर के बाद मार्गी: प्रेम और विवाह के मामले अनुकूल। शनि कुंभ में: विवाह में स्थिरता और दीर्घायु। मंगल: यदि मांगलिक दोष है, तो 2026 में विशेष उपाय के साथ विवाह उचित। इन ग्रह योगों के कारण 2026 में विवाह करने वाले दंपतियों का जीवन विशेष रूप से सुखमय रहेगा।