नवरात्रि 2026: तिथि, नवदुर्गा पूजन और व्रत की सम्पूर्ण जानकारी
नवरात्रि 2026 में दो बार आती है: चैत्र नवरात्रि 30 मार्च और शारदीय नवरात्रि 20 सितंबर से। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, व्रत, जागरण और गरबा के साथ मनाया जाने वाला यह त्योहार भारत की आस्था का प्रतीक है।
नवरात्रि 2026 की तिथियाँ
- चैत्र नवरात्रि: 30 मार्च 2026 (घटस्थापना) से 7 अप्रैल 2026 (राम नवमी)
- शारदीय नवरात्रि: 20 सितंबर 2026 (घटस्थापना) से 28 सितंबर 2026 (महानवमी)
- दशहरा: 30 सितंबर 2026
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवरात्रि 2026 में कब है?
2026 में नवरात्रि दो बार आती है: चैत्र नवरात्रि: 30 मार्च से 7 अप्रैल 2026 (राम नवमी). शारदीय नवरात्रि: 20 सितंबर से 28 सितंबर 2026 (घटस्थापना 20 सितंबर, दशहरा 30 सितंबर 2026).
नवरात्रि में नौ दिन कौन सी देवियों की पूजा होती है?
नवदुर्गा के नौ स्वरूप: पहला दिन: शैलपुत्री (पर्वत की पुत्री). दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी. तीसरा दिन: चंद्रघंटा. चौथा दिन: कूष्मांडा. पाँचवाँ दिन: स्कंदमाता. छठा दिन: कात्यायनी. सातवाँ दिन: कालरात्रि. आठवाँ दिन: महागौरी (महाअष्टमी). नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री (महानवमी).
नवरात्रि के व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं?
नवरात्रि उपवास में खा सकते हैं: फल, दूध, दही, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना, सेंधा नमक, आलू, शकरकंद, मखाना. न खाएं: गेहूं, चावल, दाल, सामान्य नमक, प्याज, लहसुन, मांस-मछली, अंडे. कुछ लोग फलाहार (केवल फल) करते हैं, कुछ एक बार भोजन करते हैं। अष्टमी-नवमी को कन्या पूजन के बाद व्रत खोला जाता है।
घटस्थापना क्या होती है और 2026 में कब है?
घटस्थापना (कलश स्थापना) नवरात्रि के पहले दिन की जाने वाली पहली पूजा है। 2026 में: चैत्र नवरात्रि घटस्थापना: 30 मार्च 2026. शारदीय नवरात्रि घटस्थापना: 20 सितंबर 2026. घटस्थापना में मिट्टी के पात्र में जौ के बीज बोए जाते हैं और कलश स्थापित किया जाता है। कलश में जल, सुपारी, मिट्टी और नारियल रखते हैं। यह कलश देवी शक्ति का प्रतीक है।
कन्या पूजन कब और कैसे करें?
कन्या पूजन (कंजक पूजन) अष्टमी (8वें दिन) या नवमी (9वें दिन) को किया जाता है। 2-10 वर्ष की आयु की कन्याओं को बुलाकर उनकी पूजा की जाती है क्योंकि वे नौ दुर्गाओं का प्रतीक हैं। पूजन विधि: पैर धोएं और अल्ता लगाएं। माथे पर तिलक लगाएं। हलवा, पूड़ी और काले चने का भोग दें। उपहार, नए कपड़े और दक्षिणा दें। उनसे आशीर्वाद लें।
नवरात्रि में नौ रंगों का क्या महत्व है?
शारदीय नवरात्रि 2026 में नौ दिनों के रंग: 1. शैलपुत्री - पीला. 2. ब्रह्मचारिणी - हरा. 3. चंद्रघंटा - भूरा. 4. कूष्मांडा - नारंगी. 5. स्कंदमाता - सफेद. 6. कात्यायनी - लाल. 7. कालरात्रि - नीला. 8. महागौरी - गुलाबी. 9. सिद्धिदात्री - बैंगनी. इन रंगों के कपड़े पहनने से देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्रत का फल बढ़ता है।
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ कैसे करें?
दुर्गा सप्तशती (चंडी पाठ) नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण पाठ है। इसमें 700 श्लोक हैं जो 13 अध्यायों में विभाजित हैं। पाठ की विधि: प्रात:काल स्नान के बाद साफ आसन पर बैठें। देवी माँ का ध्यान करें। नित्य एक से तीन अध्याय पढ़ें। पूरे नवरात्रि में एक बार संपूर्ण पाठ पूरा करें। सप्तशती का पाठ करने से समस्त कामनाएं पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि में जागरण कैसे किया जाता है?
नवरात्रि जागरण: अष्टमी की रात देवी माँ के समक्ष रात भर जागकर भजन-कीर्तन किया जाता है। गाँव और कस्बों में सामूहिक जागरण का आयोजन होता है। भजन मंडलियाँ देवी के गीत गाती हैं। ज्योति प्रज्वलित रखी जाती है। दुर्गा चालीसा, माँ भगवती की आरती और देवी स्तुति का पाठ होता है। कुछ लोग पूरी नवरात्रि (9 रातें) जागरण करते हैं।
नवरात्रि में गरबा-डांडिया क्यों खेला जाता है?
गरबा और डांडिया गुजरात और राजस्थान की पारंपरिक नवरात्रि नृत्य शैलियाँ हैं। गरबा देवी माँ के सम्मान में किया जाने वाला वृत्ताकार नृत्य है जिसे 'गर्भ' (गर्भ/उदर) शब्द से लिया गया है - जिसमें अंदर दीपक जलता है। डांडिया लकड़ी की डंडियों से खेला जाने वाला युद्धनृत्य है जो देवी और राक्षस के युद्ध का प्रतीक है। आज गरबा-डांडिया पूरे भारत और विश्व में मनाया जाता है।