पितृ पक्ष 2026: श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान

पितृ पक्ष (महालय) 2026: 4 सितंबर से 19 सितंबर 2026 तक। इन 16 दिनों में हिंदू अपने दिवंगत पूर्वजों को श्राद्ध, तर्पण और पिंड दान के माध्यम से स्मरण करते हैं। यह भाद्रपद माह का कृष्ण पक्ष है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ पक्ष 2026 कब है?

पितृ पक्ष 2026 (महालय): प्रारंभ: 4 सितंबर 2026 (भाद्रपद पूर्णिमा, प्रतिपदा से)। समाप्ति: 19 सितंबर 2026 (सर्व पितृ अमावस्या / महालय अमावस्या)। 16 दिन: भाद्रपद कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक। सर्व पितृ अमावस्या: 19 सितंबर 2026 (शनिवार) - सबसे महत्वपूर्ण दिन जब सभी पितरों का श्राद्ध एक साथ किया जा सकता है।

पितृ पक्ष में श्राद्ध कैसे किया जाता है?

श्राद्ध विधि: पितृ की मृत्यु तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में उस तिथि पर श्राद्ध करें। स्थान: घर पर या पवित्र नदी तट पर। विधि: ब्राह्मण को दक्षिण दिशा में मुख करके बिठाएं और भोजन कराएं। तर्पण: दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल, जौ और जल से तर्पण दें। पिंड दान: आटे, तिल और जल से पिंड बनाएं। दान: कपड़े, भोजन, दक्षिणा। कौवा: कौवे, गाय, कुत्ते और चींटी को भोजन दें।

पितृ पक्ष 2026 में कौन-कौन से दिन किस पितृ का श्राद्ध करें?

पितृ पक्ष 2026 तिथि-श्राद्ध गाइड: जिनकी मृत्यु प्रतिपदा को हुई: 4 सितंबर। द्वितीया: 5 सितंबर। तृतीया: 6 सितंबर। चतुर्थी: 7 सितंबर। पंचमी: 8 सितंबर। षष्ठी: 9 सितंबर। सप्तमी: 10 सितंबर। अष्टमी: 11 सितंबर। नवमी: 12 सितंबर। दशमी: 13 सितंबर। एकादशी: 14 सितंबर। द्वादशी: 15 सितंबर। त्रयोदशी: 16 सितंबर। चतुर्दशी: 17 सितंबर (दुर्घटना मृत्यु)। सर्वपितृ अमावस्या: 19 सितंबर (सभी पितर)।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 पर क्या करें?

सर्वपितृ अमावस्या 2026: 19 सितंबर 2026 (शनिवार)। इस दिन: पवित्र नदी में स्नान। दक्षिण दिशा में मुख करके तर्पण। ब्राह्मण भोज। कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन। गाय को तिल-चावल खिलाएं। पिंड दान। पीपल वृक्ष की परिक्रमा। जिन्होंने पूरे पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं किया, वे इस एक दिन पर सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं।

पितृ पक्ष में क्या खाएं और क्या न खाएं?

पितृ पक्ष में आहार नियम: खाएं: सात्विक भोजन, खीर, पुए, खिचड़ी, चावल, काले तिल, जौ, गाय के दूध से बनी वस्तुएं। पितरों को भोग: खीर और पुए पितरों का सबसे प्रिय भोजन है। न खाएं: मांस, मछली, अंडे, प्याज, लहसुन। सावधानी: पितृ पक्ष में मांसाहार से पितरों को कष्ट होता है। नई वस्तुएं: पितृ पक्ष में नई खरीद, नया घर, नया व्यापार शुरू न करें।

गया में श्राद्ध करने का क्या महत्व है?

गया (बिहार) में श्राद्ध का महत्व: गया दुनिया का सबसे पवित्र पितृ श्राद्ध स्थान है। विष्णुपद मंदिर: यहां भगवान विष्णु के चरण चिह्न हैं। फल्गु नदी: इसमें पिंड दान करने से पितरों को सीधे मोक्ष मिलता है। मान्यता: यदि गया में श्राद्ध किया जाए तो पितरों को जन्म-जन्मांतर तक मोक्ष की प्राप्ति होती है। गया पितृ पक्ष: पितृ पक्ष में गया में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

पितृ पक्ष में तर्पण की विधि क्या है?

तर्पण विधि: सामग्री: काले तिल, जौ का आटा, कुशा घास, जल (गंगाजल सर्वोत्तम)। दिशा: दक्षिण दिशा में मुख करके। अंजली: दोनों हाथों की अंजली से जल डालें। मंत्र: 'ॐ (पितृ का नाम) प्रेताय तृप्यताम् इदं ते जलम्।' तिल जल: काले तिल मिश्रित जल से तर्पण दें। गंगा तट: यदि संभव हो तो गंगा किनारे तर्पण करें। संख्या: तीन बार तर्पण दें।

यदि पितृ की मृत्यु तिथि न पता हो तो?

यदि मृत्यु तिथि अज्ञात हो: सर्वपितृ अमावस्या (19 सितंबर 2026) पर श्राद्ध करें। अमावस्या: हर महीने की अमावस्या पर तर्पण देना सर्वोत्तम विकल्प। विशेष: बड़े बुजुर्गों की मृत्यु तिथि परिवार के बड़ों से जानें। अकाल मृत्यु (दुर्घटना): चतुर्दशी (17 सितंबर 2026) पर श्राद्ध करें।

पितृ दोष के लक्षण और उपाय 2026 में क्या हैं?

पितृ दोष के लक्षण: परिवार में बार-बार बीमारी। वंश वृद्धि में बाधा। व्यापार में लगातार नुकसान। घर में कलह। परीक्षाओं में असफलता। पितृ दोष निवारण उपाय 2026: पितृ पक्ष में नियमित श्राद्ध। हर अमावस्या को तर्पण। पितृ गायत्री मंत्र जाप: 'ॐ पितृ देवाय नमः'। त्रिपिंडी श्राद्ध। गया में पिंड दान। नरसिंह पूजा। बृहस्पति उच्च (2026) पितृ दोष निवारण में सहायक है।