पितृ पक्ष 2026: पूर्वजों का 15 दिन का उत्सव

पितृ पक्ष 2026 में 8 सितंबर (भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा) से शुरू होकर 21 सितंबर (आश्विन अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या) तक चलेगा। इन 15 दिनों में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध किया जाता है। गया (बिहार) में पिंडदान का विशेष महत्व।

पितृ पक्ष 2026 की तिथियां

2026 पितृ पक्ष: शुरू: 8 सितंबर 2026 (पूर्णिमा)। सर्वपितृ अमावस्या: 21 सितंबर। 15 दिन: 8-21 सितंबर। गया पिंडदान: इस दौरान।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पितृ पक्ष 2026 कब है?

पितृ पक्ष 2026: 8 सितंबर से 21 सितंबर 2026। शुरू: भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा। समाप्त: आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ)।

पितृ पक्ष में तर्पण कैसे करें?

तर्पण विधि: सुबह: नदी या घर में। दक्षिण दिशा: मुंह। काले तिल और जल। पितृ मंत्र: "ओम पितृभ्यः स्वधा नमः"। तीन बार। धोती-कुर्ता।

सर्वपितृ अमावस्या 2026 कब है?

सर्वपितृ अमावस्या 2026: 21 सितंबर 2026। सभी पितरों के लिए। जिनकी तिथि याद नहीं: इस दिन। सबसे बड़ा श्राद्ध।

पितृ पक्ष में क्या नहीं करना चाहिए?

पितृ पक्ष में वर्जित: मांगलिक काम: नहीं। नए काम: न शुरू करें। मांस-मदिरा: नहीं। विवाह: नहीं। केश कटाई: नहीं।

गया में पिंडदान का महत्व?

गया पिंडदान: बिहार में। विष्णुपद मंदिर: गया। फल्गु नदी: पिंडदान। मोक्ष: गया में पिंडदान से पितरों को मोक्ष। 2026: 8-21 सितंबर।

पितृ पक्ष में क्या खाएं?

पितृ पक्ष भोजन: सात्विक: शाकाहारी। बिना प्याज-लहसुन: अधिक पुण्य। ब्राह्मण भोजन: प्रतिदिन। दान: अन्नदान।

2026 पितृ पक्ष का ज्योतिषीय महत्व?

2026 पितृ पक्ष: बृहस्पति कर्क: पितृ पक्ष में शुभ। सितंबर 2026: शुक्र अस्त समाप्त (6 सितंबर)। राहु कुंभ: पितृ पक्ष में। 2026: विशेष ग्रह योग।

पितृ दोष क्या है और कैसे दूर होता है?

पितृ दोष: पितरों की अतृप्त आत्मा। कुंडली: राहु-केतु-सूर्य का संयोग। निवारण: पितृ पक्ष में तर्पण। गया पिंडदान। श्राद्ध। पितृ स्तोत्र।

श्राद्ध और तर्पण में क्या अंतर है?

श्राद्ध बनाम तर्पण: तर्पण: जल अर्पण, प्रतिदिन। श्राद्ध: भोजन और ब्राह्मण पूजा, तिथि पर। दोनों: पितृ पक्ष में। तर्पण: सरल। श्राद्ध: विस्तृत।