रथ यात्रा 2026: जगन्नाथ की महायात्रा

रथ यात्रा 2026: 27 जून 2026 (शनिवार), आषाढ़ शुक्ल द्वितीया। पुरी (ओडिशा) की यह विश्वप्रसिद्ध यात्रा हिंदू धर्म की चार धाम यात्राओं में से एक जगन्नाथपुरी की सबसे बड़ी घटना है। लाखों श्रद्धालु दुनियाभर से यहां आते हैं।

रथ यात्रा 2026 की तिथि

रथ यात्रा 2026: 27 जून 2026 (शनिवार), आषाढ़ शुक्ल द्वितीया। पुरी में: सुबह से रथ खींचना शुरू। बहुदा यात्रा (वापसी): 7 जुलाई 2026।

तीन रथों के नाम और विशेषताएं

जगन्नाथ जी का रथ: नंदीघोष (16 पहिए, 45 फुट ऊंचा)। बलभद्र जी का रथ: तालध्वज (14 पहिए, 44 फुट)। सुभद्रा जी का रथ: दर्पदलन/पद्मध्वज (12 पहिए, 43 फुट)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रथ यात्रा 2026 कब है?

रथ यात्रा 2026: 27 जून 2026 (शनिवार), आषाढ़ शुक्ल द्वितीया। पुरी (ओडिशा) में। बहुदा यात्रा (वापसी रथ यात्रा): 7 जुलाई 2026। विश्व में: न्यूयॉर्क, लंदन और दुनिया के 100 से अधिक शहरों में ISKCON की रथ यात्रा।

रथ यात्रा का क्या महत्व है?

रथ यात्रा का महत्व: जगन्नाथ पुरी: हिंदू धर्म के चार धामों में से एक। सभी जाति के लोग: रथ खींचने का अधिकार, जाति-भेद नहीं। मोक्ष: रथ यात्रा में शामिल होने से 10 करोड़ यज्ञों का फल। ब्रह्मांडीय महत्व: भगवान जगन्नाथ ब्रह्मांड के स्वामी हैं।

पुरी रथ यात्रा 2026 में क्या होता है?

पुरी रथ यात्रा 2026: रथ खींचना: लाखों भक्त तीनों रथों को रस्सी से खींचते हैं। गुंडिचा मंदिर: रथ 3 किमी की दूरी पर गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं। 9 दिन: गुंडिचा मंदिर में प्रवास। बहुदा यात्रा: 7 जुलाई को वापसी यात्रा। 27 जून 2026: शनिवार को रथ यात्रा।

रथ यात्रा और जगन्नाथ जी की पौराणिक कथा?

जगन्नाथ जी की कथा: भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण ने निजधाम जाने के बाद जगन्नाथ रूप धारण किया। दारु (लकड़ी): जगन्नाथ जी की मूर्ति नीम की लकड़ी से बनी है। 12 साल में नई: हर 12 वर्ष (जब अधिक मास हो) पर नई मूर्ति बनाई जाती है। अधूरी मूर्ति: जगन्नाथ जी की मूर्ति जानबूझकर अधूरी (बिना हाथ) रखी गई है।

ISKCON रथ यात्रा 2026 कहां होगी?

ISKCON रथ यात्रा 2026: मायापुर और वृंदावन: ISKCON केंद्रों पर भव्य रथ यात्रा। दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर: प्रमुख शहरों में रथ यात्रा। विदेश में: लंदन, न्यूयॉर्क, टोरंटो, सिडनी में ISKCON रथ यात्रा। पुरी: मूल रथ यात्रा, दुनिया की सबसे बड़ी। 27 जून 2026 को दुनियाभर में एक साथ।

रथ यात्रा पर क्या प्रसाद मिलता है?

जगन्नाथ जी का महाप्रसाद: पुरी में: पांच लाख भक्तों के लिए महाप्रसाद तैयार होता है। अनोखा नियम: मिट्टी के बर्तन और लकड़ी की आग पर पकाया जाता है। 56 भोग: जगन्नाथ मंदिर में दिन में कई बार भोग लगता है। खिचड़ी: जगन्नाथ जी का प्रसिद्ध प्रसाद। महाप्रसाद: कोई भी भक्त यह प्रसाद खा सकता है।

रथ यात्रा 2026 में कोई ज्योतिषीय विशेषता है?

2026 रथ यात्रा ज्योतिष: 27 जून 2026 (शनिवार): शनि का दिन। बृहस्पति कर्क में उच्च: भगवान जगन्नाथ (विष्णु) की रथ यात्रा पर उच्च बृहस्पति का आशीर्वाद अत्यंत शुभ। देव शयनी एकादशी (17 जुलाई): रथ यात्रा (27 जून) के बाद देव शयनी। यह संयोग: रथ यात्रा के 20 दिन बाद भगवान विष्णु योग निद्रा में।

उड़ीसा के अलावा रथ यात्रा कहां कहां होती है?

भारत में रथ यात्रा के प्रमुख स्थान: पुरी (ओडिशा): मूल और सबसे भव्य। अहमदाबाद (गुजरात): देश की दूसरी सबसे बड़ी रथ यात्रा। वृंदावन (UP): ISKCON और वल्लभ संप्रदाय की रथ यात्रा। जगन्नाथ मंदिर (देशभर): कई राज्यों में छोटे जगन्नाथ मंदिर अपनी रथ यात्रा निकालते हैं।

रथ यात्रा और भगवद्गीता का क्या संबंध है?

रथ यात्रा और गीता: रथ यात्रा प्रतीक: रथ = शरीर, घोड़े = इंद्रियां, सारथी = बुद्धि, रथी = आत्मा। भगवद्गीता: अर्जुन के रथ पर बैठकर भगवान कृष्ण ने गीता का उपदेश दिया था। जगन्नाथ जी: श्रीकृष्ण का ही स्वरूप हैं। रथ यात्रा: आत्मा की परमात्मा की ओर यात्रा का प्रतीक।