शरद पूर्णिमा 2026: कोजागरी पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा 2026: 5 अक्टूबर 2026 (सोमवार), आश्विन शुक्ल पूर्णिमा। शरद पूर्णिमा वर्ष की सबसे चमकीली और सुंदर पूर्णिमा मानी जाती है। इस रात खीर बनाकर चांदनी में रखना और भगवान कृष्ण का महारास याद करना विशेष परंपरा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
शरद पूर्णिमा 2026 कब है?
शरद पूर्णिमा 2026: 5 अक्टूबर 2026 (सोमवार), आश्विन शुक्ल पूर्णिमा। इसे कोजागरी पूर्णिमा, कुमार पूर्णिमा (उड़ीसा) और नवान्न पूर्णिमा भी कहते हैं। 2026 में विशेष: सोमवार को शरद पूर्णिमा। सोमवार चंद्रमा का दिन है और पूर्णिमा चंद्र का सर्वोच्च काल, यह दोहरा चंद्र योग है।
शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों रखते हैं?
शरद पूर्णिमा पर खीर रखने की परंपरा: मान्यता: इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और अमृत वर्षा करता है। खीर में अमृत: दूध-चावल की खीर को चांदनी में रखने से चंद्रमा के अमृत गुण खीर में आते हैं। सुबह: रात भर चांदनी में रखी खीर को सुबह परिवार में बांटकर खाएं। स्वास्थ्य लाभ: माना जाता है कि इस खीर को खाने से रोग दूर होते हैं और आयु बढ़ती है।
शरद पूर्णिमा और महालक्ष्मी पूजा का क्या संबंध है?
शरद पूर्णिमा और लक्ष्मी पूजा: कोजागरी: 'को जागर्ति?' (कौन जाग रहा है?) - देवी लक्ष्मी इस रात पृथ्वी पर घूमती हैं। जो जाग रहा है: उसके घर लक्ष्मी का आगमन होता है। रात्रि जागरण: शरद पूर्णिमा की रात जागकर लक्ष्मी पूजा करें। पान-सुपारी: लक्ष्मी को विशेष प्रिय है। इस रात व्यापारी और गृहस्वामी विशेष लक्ष्मी पूजा करते हैं।
श्रीकृष्ण का महारास शरद पूर्णिमा से क्यों जुड़ा है?
श्रीकृष्ण महारास और शरद पूर्णिमा: भागवत पुराण के अनुसार: भगवान कृष्ण ने वृंदावन में आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) की रात गोपियों के साथ महारास किया था। यह आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। वृंदावन में: शरद पूर्णिमा की रात निधिवन में भगवान का रास आज भी होता है (मान्यता)। बांसुरी की धुन: कृष्ण की बांसुरी सुनकर गोपियां सब छोड़कर आई थीं।
शरद पूर्णिमा पर क्या व्रत और नियम पालें?
शरद पूर्णिमा व्रत विधि: सुबह: ब्रह्ममुहूर्त में उठकर पवित्र स्नान। उपवास: दिनभर फलाहार या सात्विक भोजन। सायंकाल: चंद्रोदय के समय लक्ष्मी और इंद्र पूजा। खीर तैयारी: सूर्यास्त से पहले दूध-चावल की खीर बनाएं। रात 12 बजे: चांदनी में रखी खीर में तुलसी दल मिलाएं और अरती करें। सुबह: प्रसाद के रूप में खीर बांटें।
कोजागरी पूर्णिमा का क्या अर्थ है?
कोजागरी का अर्थ: 'कः जागर्ति' अर्थात 'कौन जाग रहा है?' पौराणिक कथा: देवी लक्ष्मी शरद पूर्णिमा की रात पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जो लोग जाग रहे होते हैं, उन्हें धन और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए: इस रात जागरण (रात भर जागना) और लक्ष्मी पूजा की परंपरा है। बंगाल: 'लक्ष्मी पूजा' के रूप में मनाते हैं। महाराष्ट्र: 'कोजागरी पूर्णिमा' कहते हैं।
शरद पूर्णिमा 2026 में कोई विशेष ग्रह योग है?
शरद पूर्णिमा 2026 का ग्रह योग: सोमवार को पूर्णिमा: सोमवार = चंद्र का दिन, पूर्णिमा = पूर्ण चंद्र। यह 'सोम पूर्णिमा' का दुर्लभ योग है। बृहस्पति उच्च (कर्क): शरद पूर्णिमा पर बृहस्पति का उच्च प्रभाव ज्ञान और आध्यात्मिकता देता है। शनि कुंभ: अनुशासन और साधना को बल। 2026 में 5 अक्टूबर को चंद्रमा सबसे अधिक चमकीला और शुभ रहेगा।
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा को क्या अर्पित करें?
शरद पूर्णिमा पर चंद्र पूजा: अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल, दूध, चावल और चंद्रमा को अर्पित करें। मंत्र: 'ओम सोमाय नमः' (108 बार)। दूध: शुद्ध गाय का दूध चंद्र को अर्घ्य में मिलाएं। सफेद वस्तुएं: चंद्रमा को सफेद फूल, चावल, खीर, दूध से मनाएं। ध्यान: चांदनी में बैठकर चंद्र ध्यान करें। मनोकामना: शरद पूर्णिमा पर मनोकामना पूर्ण होती है (मान्यता)।
शरद पूर्णिमा और आयुर्वेद का क्या संबंध है?
शरद पूर्णिमा और आयुर्वेद: ऋतु परिवर्तन: शरद पूर्णिमा पर शरद ऋतु (पतझड़) का आगमन होता है। पित्त: शरद ऋतु में पित्त दोष बढ़ता है। खीर की चिकित्सा: दूध (पित्त शामक), चावल और चांदनी में रखी खीर पित्त शांत करती है। स्वास्थ्य: शरद पूर्णिमा की खीर खाने से आंखों की रोशनी, त्वचा की चमक और सम्पूर्ण आरोग्य में वृद्धि। चंद्र ऊर्जा: इस रात चंद्रमा की किरणें औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं।