वट सावित्री 2026: पति की दीर्घायु का व्रत
वट सावित्री 2026 में 9 जून को है। यह ज्येष्ठ अमावस्या (कृष्ण पक्ष) है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं। सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान को वापस लाया था।
वट सावित्री 2026 की तिथि
2026 वट सावित्री: 9 जून 2026 (ज्येष्ठ अमावस्या)। उत्तर भारत: पूर्णिमा (26 मई) पर भी। महाराष्ट्र: ज्येष्ठ पूर्णिमा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वट सावित्री 2026 कब है?
वट सावित्री 2026: 9 जून 2026 (ज्येष्ठ अमावस्या)। उत्तर भारत: 26 मई (ज्येष्ठ पूर्णिमा)।
वट सावित्री पूजा विधि?
पूजा विधि: बरगद वृक्ष। कच्चा सूत: 3 या 7 बार लपेटें। जल। फूल। मिठाई। सावित्री कथा: सुनें।
सावित्री और सत्यवान की कथा?
कथा: सत्यवान: अल्पायु पति। सावित्री: तपस्वी पत्नी। यमराज: प्राण ले गए। सावित्री: यमराज को तीन वर मांगे। सत्यवान: जीवित हुए।
वट सावित्री व्रत कैसे करें?
व्रत विधि: स्नान। उपवास: फलाहार। बरगद: पूजा। सूत: लपेटें। कथा: सुनें। शाम: व्रत खोलें।
2026 वट सावित्री का महत्व?
2026 वट सावित्री: 9 जून। बृहस्पति: मई 2026 से कर्क। ज्येष्ठ: गर्मी का माह। 2026: शुभ।
बरगद की पूजा क्यों?
बरगद: त्रिदेव का निवास। ब्रह्मा: जड़। विष्णु: तना। शिव: पत्ते। अमर वृक्ष। सावित्री: बरगद के नीचे।
वट सावित्री और करवा चौथ में अंतर?
वट सावित्री बनाम करवा चौथ: वट सावित्री: ज्येष्ठ। बरगद पूजा। करवा चौथ: कार्तिक, चंद्रमा। दोनों: पति की दीर्घायु। वट सावित्री: कथा केंद्रित।
वट सावित्री पर क्या दान करें?
दान: सुहाग: सुहागन को दान। सूत। मिठाई। वस्त्र। बरगद: पानी दें।
वट सावित्री में क्या खाएं?
वट सावित्री भोजन: व्रत: फलाहार। दूध, दही, फल। मिठाई: प्रसाद। शाम: पारण। ब्राह्मण: भोजन।