सोमवती अमावस्या 2026: सोम और पितरों का मिलन
सोमवती अमावस्या वह दुर्लभ अवसर है जब अमावस्या सोमवार को पड़ती है। 2026 में 27 अप्रैल (वैशाख अमावस्या) सोमवती अमावस्या है। इस दिन पीपल की परिक्रमा और पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं।
सोमवती अमावस्या 2026 की तिथि
2026 सोमवती अमावस्या: 27 अप्रैल 2026 (सोमवार, वैशाख अमावस्या)। समय: स्थानीय पंचांग से देखें। पूजा: सुबह 6 से 10 बजे तक। तर्पण: गंगा या किसी भी पवित्र नदी पर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
सोमवती अमावस्या 2026: 27 अप्रैल 2026 (वैशाख कृष्ण अमावस्या)। यह सोमवार है, इसलिए सोमवती। दुर्लभ: साल में 1-2 बार ही होती है।
सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
सोमवती अमावस्या उपाय: पीपल पूजा: 108 या 7 परिक्रमा। कच्चा सूत: पीपल पर लपेटें। पितृ तर्पण: काले तिल और जल। स्नान: गंगा या नदी में। दान: अन्न, वस्त्र। उपवास: व्रत रखें।
सोमवती अमावस्या में पीपल की पूजा कैसे करें?
पीपल पूजा विधि: सुबह: स्नान। पीपल: जल, दूध, फूल चढ़ाएं। सूत: कच्चा धागा पीपल पर लपेटें (108 परिक्रमा)। मंत्र: "वृक्षराज पिप्पल नमस्तुभ्यं"। प्रसाद: मिठाई। लक्ष्मी: पीपल में लक्ष्मी का वास।
सोमवती अमावस्या व्रत किसके लिए है?
सोमवती अमावस्या व्रत: विवाहित महिलाएं: पति की दीर्घायु के लिए। सौभाग्य: अखंड सौभाग्य के लिए। पितरों के लिए: तर्पण और दान। संतान: संतान प्राप्ति के लिए भी। पुरुष: पितृ कार्य।
सोमवती अमावस्या पर क्या दान करें?
सोमवती अमावस्या दान: सफेद चीजें: चावल, दही, दूध, चांदी। सुहाग की चीजें: विवाहित महिलाओं को। खाना: ब्राह्मण को। गाय: गाय को चारा। कुआं: यदि हो तो कुएं की पूजा।
सोमवती अमावस्या और शिव पूजा?
सोमवती और शिव: सोमवार: शिव का दिन। अमावस्या: पितरों का समय। सोमवती: दोनों का संगम। शिव पूजा: इस दिन शिव अभिषेक विशेष। "सोम" (चंद्रमा): शिव के मस्तक पर, इसलिए सोमवार शिव का।
2026 में सोमवती अमावस्या का महत्व?
2026 सोमवती: 27 अप्रैल, अक्षय तृतीया (22 अप्रैल) के बाद। बृहस्पति: अप्रैल में वृषभ में। पुण्य: अक्षय तृतीया और सोमवती दोनों अप्रैल में।
सोमवती अमावस्या और शनि अमावस्या में अंतर?
सोमवती बनाम शनि अमावस्या: सोमवती: सोमवार, शिव, चंद्रमा, पितृ। शनि अमावस्या: शनिवार, शनि, कर्म, पितृ। सोमवती: महिलाओं के लिए विशेष। शनि अमावस्या: शनि दोष निवारण। दोनों: पितृ तर्पण का महत्व।
सोमवती अमावस्या पर 108 परिक्रमा का महत्व?
108 परिक्रमा: 108: पवित्र संख्या। पीपल: ब्रह्मा, विष्णु, महेश का वास। 108 परिक्रमा: सभी पापों से मुक्ति। फल: मोक्ष और सौभाग्य। एक परिक्रमा: यदि 108 न हो तो 7 या 11 परिक्रमा करें।
सोमवती अमावस्या पर व्रत कैसे करें?
सोमवती व्रत विधि: ब्रह्म मुहूर्त: 4 बजे उठें। स्नान: स्वच्छ वस्त्र। पीपल पूजा: मंदिर या पार्क में। उपवास: फलाहार या एक समय भोजन। शाम: दीपक जलाएं। पारण: सूर्यास्त के बाद।