छठ पूजा: सूर्य देव का महापर्व

छठ पूजा सूर्य देव और छठी माई को समर्पित बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का सबसे पवित्र पर्व है। 4 दिनों के इस उत्सव में व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखकर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।

छठ पूजा - वर्षवार जानकारी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छठ पूजा क्या है?

छठ पूजा (छठी मैया व्रत) सूर्य देव और उनकी बहन षष्ठी देवी (छठी माई) को समर्पित हिंदू पर्व है। यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी (6ठी) तिथि को मनाया जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल का यह सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है। व्रती महिलाएं (और पुरुष) 36 घंटे से अधिक निर्जला उपवास रखती हैं।

छठ पूजा 2026 कब है?

छठ पूजा 2026: नहाय-खाय: 22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार). खरना: 23 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार). संध्या अर्घ्य (पहला अर्घ्य): 24 अक्टूबर 2026 (शनिवार) सायंकाल. उगते सूर्य को अर्घ्य (दूसरा अर्घ्य): 25 अक्टूबर 2026 (रविवार) सूर्योदय.

छठ पूजा में 4 दिन क्या होता है?

छठ पूजा के 4 दिन: दिन 1 (नहाय-खाय): व्रती गंगा या पवित्र नदी में स्नान करती हैं। घर की सफाई और शुद्धिकरण। कद्दू-भात (कद्दू की सब्जी और चावल) का प्रसाद बनाते हैं। दिन 2 (खरना/लोहंडा): पूरे दिन उपवास। शाम को खीर (रसिया), रोटी और फल का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित करते हैं। दिन 3 (संध्या अर्घ्य): नदी या जलाशय के घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। दिन 4 (उगते सूर्य को अर्घ्य): सूर्योदय पर उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ते हैं।

छठ पूजा में किस चीज का प्रसाद बनाते हैं?

छठ पूजा का पारंपरिक प्रसाद: ठेकुआ (गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बनी कुकी): छठ का सबसे महत्वपूर्ण प्रसाद। खीर (चावल और दूध की मीठी खीर): खरना पर। फल: केला (विशेषकर छोटा केला/कदली), गन्ना, नारियल, नींबू। कद्दू-भात: नहाय-खाय पर। सूप (बांस की टोकरी): प्रसाद रखने के लिए। मूली: घाट पर अर्पित की जाती है। नारियल और नींबू: जल में प्रवाहित किए जाते हैं।

छठ पूजा में घाट पर क्या होता है?

छठ पूजा घाट पर: शाम को: हजारों व्रती अपनी-अपनी सूप (बांस की टोकरी) में प्रसाद लेकर घाट पर आते हैं। पानी में खड़े होकर (कमर तक) डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। 'केलवा जे फरेला घवद से' जैसे छठ गीत गाए जाते हैं। अगली सुबह: सूर्योदय से पहले व्रती घाट पहुंचती हैं। उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ती हैं। आम, पान और प्रसाद बांटा जाता है।

छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व क्या है?

छठ पूजा का वैज्ञानिक महत्व: सूर्य पूजा: सूर्य की किरणें विटामिन D का प्रमुख स्रोत हैं। संध्याकालीन और उगते सूर्य की UV-A किरणें (UV-B से कम हानिकारक और लाभकारी) से त्वचा की कई बीमारियां ठीक होती हैं। जल स्नान: नदी के शीतल जल में खड़े रहने से रक्त संचार बेहतर होता है। निर्जला उपवास: 36 घंटे का उपवास शरीर को detox करता है और पाचन तंत्र को आराम देता है। प्राकृतिक प्रसाद: ठेकुआ, फल, और कच्ची सब्जियां प्राकृतिक और पोषणयुक्त हैं।

छठ पूजा में छठी मैया कौन हैं?

छठी माई (षष्ठी देवी) देवसेना, भगवान कार्तिकेय की पत्नी हैं। कुछ मान्यताओं में वे ब्रह्मा की मानसपुत्री हैं। वे संतान सुख, शिशु की रक्षा और स्वास्थ्य की देवी हैं। छठ पूजा में माताएं अपने पुत्र-पुत्रियों की दीर्घायु और सुख के लिए छठी माई की पूजा करती हैं। छठी माई की पूजा करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी मिलता है, ऐसी मान्यता है।

छठ पूजा में क्या पहनते हैं?

छठ पूजा पोशाक: व्रती महिलाएं: पीले या नारंगी रंग की साड़ी (सौभाग्य का रंग)। कुछ व्रती बिना सिले कपड़े (भारतीय शैली में एक कपड़ा) पहनती हैं। चांदी या सोने के आभूषण पहनती हैं। बालों में गजरा और पारंपरिक सुहागन श्रृंगार। परिवार के सदस्य: साफ और नए कपड़े। घाट पर: ठंड में नदी में खड़े रहने के लिए ऐसे कपड़े जो जल में भीगने पर भी उचित लगें।

छठ पूजा कहां-कहां मनाई जाती है?

छठ पूजा के प्रमुख स्थान: भारत में: पटना (बिहार का सबसे बड़ा उत्सव), वाराणसी, प्रयागराज, दिल्ली (यमुना घाट पर हजारों श्रद्धालु), मुंबई (जुहू बीच पर), भागलपुर, जमशेदपुर, रांची। नेपाल: काठमांडू, जनकपुर में भव्य उत्सव। विदेशों में: मॉरीशस, फिजी, त्रिनिदाद में प्रवासी भारतीय और नेपाली समुदाय छठ मनाते हैं। दिल्ली में छठ राज्य त्योहार है।