दिवाली: दीपों का पर्व, पूजा विधि और हिंदू नव वर्ष की शुरुआत
दिवाली हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और सबसे रोशन त्योहार है। कार्तिक अमावस्या की रात दीपकों की जगमगाहट, मां लक्ष्मी का पूजन और मिठाइयों का आदान-प्रदान इस पर्व की पहचान है।
वर्ष अनुसार दिवाली की तिथि
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिवाली का त्योहार कब मनाया जाता है?
दिवाली प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाई जाती है। यह सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर माह में आती है। 2026 में दिवाली 20 अक्टूबर को, 2025 में 20 अक्टूबर को, और 2024 में 1 नवंबर को मनाई गई थी।
दिवाली का क्या अर्थ है?
'दीपावली' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से बना है: 'दीप' (दीपक/लालटेन) और 'आवली' (पंक्ति)। इसका अर्थ है दीपकों की पंक्ति। हिंदी में इसे 'दिवाली' भी कहते हैं। यह त्योहार प्रकाश का उत्सव है जो अंधकार पर प्रकाश की, असत्य पर सत्य की और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
दिवाली पर किस देवी-देवता की पूजा होती है?
दिवाली पर मुख्य रूप से मां लक्ष्मी (धन और समृद्धि की देवी) और भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) की पूजा की जाती है। इसके अलावा धनतेरस पर यमराज और भगवान धन्वंतरि की, नरक चतुर्दशी पर यम और हनुमान जी की, और गोवर्धन पूजा पर भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। देश के अलग-अलग हिस्सों में काली पूजा (बंगाल), सरस्वती पूजा और कुबेर पूजा भी की जाती है।
दिवाली से पहले घर में क्या तैयारियां करें?
दिवाली की तैयारियां: 1. घर की गहरी सफाई करें, पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं हटाएं। 2. घर में रंग-पुताई या सजावट करें। 3. दीपकों और मोमबत्तियों का इंतजाम करें। 4. रंगोली की सामग्री तैयार रखें। 5. पूजा सामग्री जुटाएं: लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, कलश, फूल, मिठाई, खील-बताशे। 6. नए कपड़े और आभूषण की खरीदारी धनतेरस से पहले करें। 7. घर में LED दीप और झालरें लगाएं।
दिवाली की रात क्या न करें?
दिवाली की रात इन कार्यों से बचें: लक्ष्मी पूजन के बाद घर का कूड़ा बाहर न निकालें। बुरे शब्दों और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। जुआ और मदिरापान से परहेज करें (हालांकि कुछ क्षेत्रों में परंपरा अलग है)। लक्ष्मी पूजन के समय झगड़ा न करें। रात 10 बजे के बाद पटाखे न जलाएं। ऐसे किसी के घर न जाएं जो दुख या शोक में हो।
दिवाली पर मिठाई का क्या महत्व है?
दिवाली पर मिठाई का आदान-प्रदान प्रेम और मैत्री का प्रतीक है। लड्डू, बर्फी, काजू कतली, गुझिया और खोए की मिठाइयां विशेष रूप से बनाई जाती हैं। मां लक्ष्मी को मिठाई का भोग लगाकर बाद में सबको प्रसाद के रूप में बांटी जाती है। परिवार, पड़ोसी और मित्रों को मिठाई के डिब्बे भेंट किए जाते हैं। घर में बनी मिठाइयों को बाजार की मिठाइयों से अधिक शुभ माना जाता है।
दिवाली के दिन कौन से मंत्र पढ़ें?
दिवाली पर पढ़े जाने वाले मंत्र: मां लक्ष्मी का मंत्र: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।' गणेश मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः।' सरल लक्ष्मी मंत्र: 'ॐ महालक्ष्म्यै नमः' (108 बार)। श्री सूक्त का पाठ करें। कनकधारा स्तोत्र का पाठ भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
क्या दिवाली पर पटाखे जलाना जरूरी है?
नहीं, दिवाली पर पटाखे जलाना अनिवार्य नहीं है। पारंपरिक दिवाली में दीपकों और मोमबत्तियों का विशेष महत्व है, न कि पटाखों का। पटाखों की परंपरा अपेक्षाकृत नई है। आजकल बहुत से लोग पर्यावरण और स्वास्थ्य की दृष्टि से बिना पटाखों के दिवाली मनाना पसंद करते हैं। दीपक जलाना, लक्ष्मी पूजन और मिठाई बांटना ये दिवाली की असली परंपराएं हैं।
दिवाली और दीपावली में क्या अंतर है?
दिवाली और दीपावली एक ही त्योहार के दो नाम हैं। 'दीपावली' अधिक औपचारिक और संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है 'दीपकों की पंक्ति'। 'दिवाली' हिंदी का लोकप्रिय रूप है। अंग्रेजी में Diwali और Deepavali दोनों प्रयोग होते हैं। दक्षिण भारत में 'दीपावली' अधिक प्रचलित है जबकि उत्तर और पश्चिम भारत में 'दिवाली' ज्यादा बोला जाता है।