दशहरा 2026: बुराई पर अच्छाई की विजय

दशहरा (विजयदशमी) 2026: 1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार), आश्विन शुक्ल दशमी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य, और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था।

दशहरा 2026 की तिथि

दशहरा 2026: 1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार), आश्विन शुक्ल दशमी। गुरुवार को दशहरा: बृहस्पति (धर्म और सत्य के कारक) का दिन। 2026 में बृहस्पति उच्च: दशहरे पर उच्च बृहस्पति का विशेष महत्व।

दशहरा का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व

दशहरे के तीन मुख्य कारण: राम-रावण: भगवान राम ने रावण का वध किया। दुर्गा-महिषासुर: माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया (नवरात्रि के बाद)। पांडव-वनवास: अज्ञातवास समाप्त होने पर अर्जुन ने शमी वृक्ष से अस्त्र निकाले।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दशहरा 2026 कब है?

दशहरा 2026: 1 अक्टूबर 2026 (गुरुवार), आश्विन शुक्ल दशमी। नवरात्रि: 22-30 सितंबर 2026। दशमी (दशहरा): 1 अक्टूबर 2026। दीपावली: 21 अक्टूबर 2026।

रावण दहन 2026 कब और कहां होगा?

रावण दहन 2026: 1 अक्टूबर 2026 की शाम। दिल्ली: रामलीला मैदान में भव्य रावण दहन। लखनऊ: रामलीला और रावण दहन। अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि के पास भव्य उत्सव। मैसूर: 10 दिवसीय दशहरा उत्सव के साथ। रावण के पुतले की ऊंचाई: दिल्ली में 50-70 फुट।

दशहरा पर विजयादशमी पूजा क्या है?

विजयादशमी पूजा: अपराजिता पूजा: उत्तर-पूर्व दिशा में जाकर देवी अपराजिता की पूजा। शमी पूजा: शमी (खेजड़ी) पेड़ की पूजा। शस्त्र पूजा: व्यापारी अपने उपकरणों, कारीगर अपने औजारों की पूजा करते हैं। नीलकंठ दर्शन: दशमी पर नीलकंठ पक्षी देखना शुभ।

दशहरे पर शमी पूजा क्यों होती है?

शमी पूजा का कारण: महाभारत में: अर्जुन ने अज्ञातवास में अपने अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छुपाए थे। अज्ञातवास समाप्त होने पर: विजयादशमी को अर्जुन ने शमी से अस्त्र निकाले और विजय प्राप्त की। इसलिए: दशहरे पर शमी पत्ते देना "सोने का आदान-प्रदान" परंपरा बनी। उपहार: इस दिन शमी की पत्तियां (स्वर्ण/सोना का प्रतीक) एक-दूसरे को देते हैं।

दशहरा और मैसूर उत्सव 2026?

मैसूर दशहरा 2026: कर्नाटक में 10 दिवसीय उत्सव। 22 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026। चामुंडेश्वरी देवी: मैसूर की अधिष्ठात्री देवी। हाथी जुलूस: मैसूर पैलेस से विशाल हाथी जुलूस। UNESCO: मैसूर दशहरा UNESCOकी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत में। 2026: 1 अक्टूबर को गुरुवार, उत्सव का चरम।

दशहरे का ज्योतिषीय महत्व 2026 में?

2026 दशहरा ज्योतिष: गुरुवार + दशमी: बृहस्पति (धर्म) का दिन। बृहस्पति उच्च (कर्क): धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा उच्च बृहस्पति पर। नवरात्रि के बाद: शक्ति संचय का उत्सव। 2026: दशहरे के 20 दिन बाद दीपावली, यह पूरा क्लस्टर बृहस्पति उच्च के साथ अत्यंत शुभ।

दशहरे पर क्या करें और क्या न करें?

दशहरे पर करें: रावण दहन में भाग लें। रामलीला देखें। शमी पत्ते का आदान-प्रदान करें। अस्त्र/उपकरण पूजा। नीलकंठ दर्शन। न करें: झूठ बोलना। क्रोध और हिंसा। बुराई का अनुसरण। शराब और मांस।

रामलीला और दशहरे का क्या संबंध है?

रामलीला और दशहरा: रामलीला: नवरात्रि के 9 दिन से शुरू होती है। 10वें दिन (दशमी): रावण वध और रामलीला का समापन। दिल्ली रामलीला: 150 साल से अधिक की परंपरा। वाराणसी रामलीला: UNESCO की अमूर्त विरासत। गोस्वामी तुलसीदास: रामचरितमानस पर आधारित रामलीला की परंपरा।

दशहरे पर क्या खरीदना शुभ है?

दशहरे पर शुभ खरीदारी: सोना और चांदी: विजयादशमी पर खरीदना अत्यंत शुभ। नए वस्त्र: नई पोशाक। वाहन: विजयादशमी पर नया वाहन। हथियार/उपकरण: व्यापारी अपने उपकरण नए या शुभ करते हैं। नया व्यापार: विजयादशमी पर नई शुरुआत शुभ।