निर्जला एकादशी 2026: बिना जल का व्रत
निर्जला एकादशी 2026 में 7 जून को है। यह वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशी मानी जाती है। इस दिन अन्न तो छोड़ते ही हैं, पानी भी नहीं पीते। मान्यता है कि इस एक व्रत से वर्ष की सभी 24 एकादशियों का पुण्य मिलता है।
निर्जला एकादशी 2026 की तिथि
2026 निर्जला एकादशी: तिथि: 7 जून 2026 (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी)। दूसरा नाम: भीमसेनी एकादशी, पांडव एकादशी। व्रत: 6 जून की रात से 8 जून सुबह। पारण: 8 जून प्रातःकाल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
निर्जला एकादशी 2026 कब है?
निर्जला एकादशी 2026: 7 जून 2026 (ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी)। दूसरा नाम: भीम एकादशी। इस दिन: जल भी नहीं ग्रहण करते। यही सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी एकादशी है।
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं?
निर्जला व्रत: नहीं, पानी भी नहीं। निर्जला का अर्थ: बिना जल। इसीलिए: सबसे कठिन। अपवाद: आचमन (पूजा में) के लिए तुलसी मिश्रित जल ठीक है। बीमार: बीमार या बुजुर्ग लोग सामान्य एकादशी व्रत कर सकते हैं।
निर्जला एकादशी व्रत विधि क्या है?
निर्जला व्रत विधि: दशमी (6 जून): रात को भोजन न करें। एकादशी (7 जून): प्रातः स्नान, विष्णु पूजा। व्रत: पानी भी नहीं। जप: विष्णु सहस्रनाम, एकादशी माहात्म्य। रात: भजन-कीर्तन। द्वादशी (8 जून): पारण, दान।
निर्जला एकादशी का क्या महत्व है?
निर्जला एकादशी महत्व: 24 एकादशी: इस एक व्रत से सभी 24 एकादशियों का फल। भीम: महाभारत में भीम ने यह व्रत किया। व्यास जी: ने भीम को इस व्रत का उपाय बताया। मोक्ष: इस व्रत से विष्णु लोक मिलता है।
निर्जला एकादशी पर दान क्या दें?
निर्जला एकादशी दान: जल: जल का दान सर्वोत्तम (प्याऊ, सरोवर)। छाता: गर्मी में छाता दान। जूते-चप्पल: पैदल यात्रियों को। पंखा: ताड़पत्र का पंखा। खाना: ब्राह्मण और गरीबों को। ठंडा पेय: जलजीरा, नींबू पानी।
निर्जला एकादशी पारण 2026 कब?
निर्जला एकादशी पारण 2026: 8 जून 2026 (द्वादशी)। पारण समय: 8 जून प्रातः 5:30 से 8:00 के बीच। पारण विधि: तुलसी पत्ता, तिल, जल से शुरू। पारण: द्वादशी का क्षय होने से पहले।
निर्जला एकादशी में क्या खा सकते हैं?
निर्जला व्रत: कुछ नहीं! यही इस व्रत की विशेषता है। जल भी नहीं। यदि बिल्कुल असंभव: फल और जल लेकर निर्जला के बजाय फलाहारी एकादशी करें। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार: सामान्य एकादशी व्रत करें।
भीमसेनी एकादशी क्यों कहते हैं?
भीमसेनी एकादशी: भीम: महाभारत में भीम खाने-पीने के शौकीन थे। व्यास जी: उन्होंने भीम को साल में एक एकादशी (निर्जला) का सुझाव दिया। भीम: ने यह व्रत किया और सभी एकादशियों का फल पाया। इसीलिए: भीमसेनी या पांडव एकादशी।
2026 में निर्जला एकादशी की ज्योतिषीय विशेषता?
2026 निर्जला एकादशी ज्योतिष: 7 जून 2026: बृहस्पति कर्क में प्रवेश के बाद। बृहस्पति उच्च: इस दिन व्रत और दान का फल कई गुना। जून 2026: देव शयनी (17 जुलाई) से पहले, व्रत के लिए उत्तम समय।