ग्रहण 2026: सूर्य और चंद्र ग्रहण

ग्रहण 2026 में कई महत्वपूर्ण ग्रहण पड़ेंगे। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है (अमावस्या)। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है (पूर्णिमा)। 2026 में राहु-केतु का 18 जुलाई को परिवर्तन ग्रहणों की स्थिति को प्रभावित करता है।

2026 के ग्रहण

2026 सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी (वलयाकार), 12-13 अगस्त (पूर्ण)। 2026 चंद्र ग्रहण: 3 मार्च (पूर्ण), 28 अगस्त (आंशिक)। भारत में दृश्य: ग्रहण दृश्यता भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। सूतक: भारत में दृश्य ग्रहण में ही सूतक लागू होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में कितने ग्रहण हैं?

2026 ग्रहण: कुल 4 ग्रहण। 2 सूर्य ग्रहण: 17 फरवरी (वलयाकार), 12-13 अगस्त (पूर्ण)। 2 चंद्र ग्रहण: 3 मार्च (पूर्ण), 28 अगस्त (आंशिक)। भारत में दृश्य: कुछ भारत में दिखेंगे, कुछ नहीं।

2026 में भारत में कौन सा ग्रहण दिखेगा?

2026 भारत में ग्रहण: 3 मार्च चंद्र ग्रहण: भारत में आंशिक दृश्य। 12-13 अगस्त सूर्य ग्रहण: भारत के कुछ भागों में। 28 अगस्त चंद्र ग्रहण: भारत में आंशिक। सटीक जानकारी: नासा और खगोल शास्त्र संस्थान से।

सूतक काल 2026 में कब है?

सूतक काल: केवल: भारत में दृश्य ग्रहण में ही। सूर्य ग्रहण सूतक: 12 घंटे पहले। चंद्र ग्रहण सूतक: 9 घंटे पहले। अदृश्य ग्रहण: सूतक नहीं। सूतक में: खाना नहीं बनाते, मंदिर बंद, बाहर नहीं जाते।

ग्रहण में क्या नहीं करना चाहिए?

ग्रहण वर्जित: खाना: ग्रहण काल में न बनाएं और न खाएं। तुलसी: ग्रहण से पहले भोजन में तुलसी डाल दें। मंदिर: ग्रहण काल में बंद। देखना: नंगी आंखों से न देखें। गर्भवती: बाहर न जाएं। सोना: ग्रहण काल में न सोएं।

ग्रहण के बाद क्या करें?

ग्रहण के बाद: स्नान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान। दान: ग्रहण के बाद दान का विशेष महत्व। मंदिर: स्नान के बाद मंदिर जाएं। भोजन: शुद्ध नया भोजन बनाएं। मंत्र जाप: ग्रहण काल में मंत्र जाप शुभ।

चंद्र ग्रहण 2026 कब है?

चंद्र ग्रहण 2026: पहला: 3 मार्च 2026 (पूर्ण चंद्र ग्रहण)। दूसरा: 28 अगस्त 2026 (आंशिक)। पूर्णिमा: चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को। राहु-केतु: चंद्र ग्रहण राहु या केतु के निकट होने पर।

सूर्य ग्रहण 2026 कब है?

सूर्य ग्रहण 2026: पहला: 17 फरवरी 2026 (वलयाकार, अमेरिका-अफ्रीका)। दूसरा: 12-13 अगस्त 2026 (पूर्ण, यूरोप-अफ्रीका)। अमावस्या: सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या को। राहु: सूर्य और चंद्र के बीच राहु आने पर।

ग्रहण का ज्योतिषीय प्रभाव?

ग्रहण ज्योतिष: राशि प्रभाव: जिस राशि में ग्रहण हो उस राशि पर विशेष प्रभाव। शुभ कार्य: ग्रहण काल में नए काम न शुरू करें। रत्न: ग्रहण से पहले हटाएं, बाद में पहनें। दशा: जिनकी राहु-केतु दशा हो उन पर विशेष असर।

ग्रहण में मंत्र जाप क्यों करते हैं?

ग्रहण में मंत्र: मान्यता: ग्रहण काल में मंत्र जाप का फल 10,000 गुना। कारण: ग्रहण में ऊर्जा अत्यधिक बढ़ जाती है। उचित मंत्र: ओम नमः शिवाय, गायत्री, विष्णु सहस्रनाम। अनुचित: इस काल में ब्राह्मण और साधक जप करते हैं।