महाशिवरात्रि 2026: भगवान शिव की महारात्रि

महाशिवरात्रि 2026: 26 फरवरी 2026 (गुरुवार), फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी। यह वर्ष की सबसे पवित्र शिव-रात्रि है। इस रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। रात्रि के चार प्रहरों में जागरण और पूजा का विशेष महत्व है।

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और मुहूर्त

महाशिवरात्रि 2026: 26 फरवरी 2026 (गुरुवार)। निशीथ काल पूजा: रात 12:09 से 1:00 बजे। चतुर्दशी तिथि: 26 फरवरी शाम से 27 फरवरी रात तक। चार प्रहर पूजा: रात्रि 9-12, 12-3, 3-6 बजे।

महाशिवरात्रि पूजा विधि

शाम को: स्नान, संकल्प। शिवलिंग पर अभिषेक: जल, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल। बेलपत्र, धतूरा, भांग: अर्पित करें। मंत्र: ओम नमः शिवाय (108 बार)। रात के चार प्रहरों में चार अभिषेक। सुबह: पारण (व्रत खोलना)।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाशिवरात्रि 2026 कब है?

महाशिवरात्रि 2026: 26 फरवरी 2026 (गुरुवार), फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी। यह हिंदू कैलेंडर की सबसे पवित्र रात है। निशीथ काल (मध्यरात्रि) पूजा: 26-27 फरवरी की मध्यरात्रि।

महाशिवरात्रि का व्रत कैसे रखें?

महाशिवरात्रि व्रत: सुबह: स्नान और संकल्प लें। दिनभर: निर्जला या फलाहार व्रत। शाम: शिव पूजा और अभिषेक। रात: चार प्रहर में शिवलिंग पूजन। सुबह: प्रसाद (पंचामृत) से पारण।

महाशिवरात्रि पर क्या अर्पित करें?

शिव को प्रिय वस्तुएं: बेलपत्र (शिव का सबसे प्रिय), धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, काले तिल, जल, दूध, दही, घी, शहद। चंदन: शिवलिंग पर लगाएं। नीले फूल: अर्पित करें।

महाशिवरात्रि और शिव-पार्वती विवाह का क्या संबंध है?

पौराणिक मान्यता: इसी रात भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। एक अन्य मान्यता: इस रात शिव ने तांडव नृत्य किया था। तीसरी मान्यता: इसी रात शिव जी ने समुद्र मंथन का विष (हलाहल) पिया था और देवताओं की रक्षा की थी।

महाशिवरात्रि पर ओम नमः शिवाय के अलावा और कौन से मंत्र जपें?

महाशिवरात्रि के मंत्र: ओम नमः शिवाय (सर्वश्रेष्ठ), महामृत्युंजय मंत्र: ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। शिव गायत्री: ओम तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। रुद्राष्टाध्यायी, शिव पुराण पाठ।

महाशिवरात्रि की रात जागरण क्यों करते हैं?

महाशिवरात्रि जागरण का कारण: शिव रात्रि में सबसे अधिक जागरूक रहते हैं। चार प्रहर की पूजा: इस रात की चार पहर (प्रत्येक 3 घंटे) में पूजा करने का विशेष फल। मान्यता: जो इस रात जागकर शिव का ध्यान करता है उसे शिवलोक मिलता है। भजन, कीर्तन, शिव कथा से रात गुजारना शुभ है।

महाशिवरात्रि पर 2026 में क्या विशेष ग्रह योग है?

2026 महाशिवरात्रि ग्रह योग: गुरुवार को महाशिवरात्रि: गुरुवार बृहस्पति का दिन है और बृहस्पति शिव के परम भक्त हैं। शुक्र मीन में (उच्च): फाल्गुन में शुक्र उच्च राशि में प्रेम और भक्ति को बल देता है। 2026 में महाशिवरात्रि का गुरुवार से मेल अत्यंत शुभ योग है।

महाशिवरात्रि पर उपवास में क्या खाएं?

महाशिवरात्रि उपवास में खाएं: फल, साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, शकरकंद, दूध, दही, मखाने। न खाएं: अनाज, चावल, दाल, नमक (निर्जला व्रत में जल भी नहीं)। पारण: अगले दिन सुबह पंचामृत और फलाहार से व्रत खोलें।

काशी विश्वनाथ में महाशिवरात्रि 2026 कैसे मनाई जाएगी?

काशी (वाराणसी) में महाशिवरात्रि 2026: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में 24-घंटे विशेष अभिषेक। गंगा आरती: महाशिवरात्रि पर विशेष गंगा आरती। दशाश्वमेध घाट: लाखों श्रद्धालु शिव पूजन। पूरी काशी रात भर जागती है। 2026 में गुरुवार: काशी में विशेष रुद्राभिषेक।