होलिका दहन मुहूर्त 2026: बुराई के दहन का समय

होलिका दहन 2026: 13 मार्च 2026 (शुक्रवार), फाल्गुन पूर्णिमा। होली 2026: 14 मार्च (शनिवार)। होलिका दहन भद्रा रहित काल में होना चाहिए। फाल्गुन पूर्णिमा पर प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में होलिका दहन किया जाता है। भक्त प्रहलाद की रक्षा और होलिका के दहन की यह पौराणिक कथा पर आधारित पर्व है।

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त

होलिका दहन 2026 मुहूर्त: तिथि: 13 मार्च 2026 (शुक्रवार), फाल्गुन पूर्णिमा। होलिका दहन: शाम के बाद, प्रदोष काल में। भद्रा: भद्रा रहित काल में ही दहन करें। शुभ समय: स्थानीय पंचांग से भद्रा समाप्ति के बाद। रंगवाली होली: 14 मार्च 2026 (शनिवार)।

होलाष्टक 2026

होलाष्टक 2026: होली से 8 दिन पहले: 6 मार्च 2026 से। होलाष्टक: फाल्गुन कृष्ण अष्टमी से पूर्णिमा तक। इस दौरान: शुभ कार्य (विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित। समाप्ति: होलिका दहन के साथ। होलाष्टक: 6-13 मार्च 2026।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

होलिका दहन 2026 कब है?

होलिका दहन 2026: 13 मार्च 2026 (शुक्रवार)। फाल्गुन पूर्णिमा। रंगवाली होली: 14 मार्च 2026 (शनिवार)।

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है?

होलिका दहन मुहूर्त: प्रदोष काल: सूर्यास्त (लगभग 6:30 बजे) के बाद। भद्रा: भद्रा समाप्त होने के बाद। 2026 में: 13 मार्च शाम भद्रा की स्थिति पंचांग से जांचें। सामान्यतः: रात 8-11 बजे के बीच। स्थानीय: अपने शहर का पंचांग देखें।

होलिका दहन में क्या सामग्री चाहिए?

होलिका दहन सामग्री: लकड़ियां और गोबर के उपले: होलिका के लिए। गेहूं की बाल: नई फसल का प्रतीक। नारियल, बताशे, गुलाल। रोली, अक्षत, कपास। पानी का लोटा: परिक्रमा के लिए। होली की पूजा सामग्री: फूल, हल्दी।

होलिका दहन की कथा क्या है?

होलिका दहन की पौराणिक कथा: हिरण्यकशिपु: राक्षस राजा जो भगवान विष्णु का शत्रु था। प्रहलाद: उसका पुत्र, जो विष्णु भक्त था। होलिका: हिरण्यकशिपु की बहन, जिसे अग्नि से न जलने का वर था। षड्यंत्र: होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठी। भगवान की कृपा: प्रहलाद सुरक्षित रहे, होलिका जल गई। संदेश: भक्ति की जीत, अहंकार का नाश।

भद्रा में होलिका दहन क्यों नहीं करते?

भद्रा और होलिका दहन: भद्रा: शनि की बहन, अशुभ काल। भद्रा में होलिका दहन: अत्यंत अशुभ, देश-समाज पर बुरा प्रभाव मानते हैं। परंपरा: भद्रा मुखी समय में कभी भी होलिका दहन न करें। भद्रा समाप्ति: स्थानीय पंचांग से पता करें। 2026 में: 13 मार्च को भद्रा की स्थिति पंचांग से जांचें।

होलिका की परिक्रमा कैसे करें?

होलिका परिक्रमा: दिशा: होलिका के चारों ओर परिक्रमा करें। चक्कर: 3, 5 या 7 परिक्रमाएं। जल अर्पण: लोटे से जल चढ़ाएं। मंत्र: "असृक्पाभयसंत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः।" गेहूं की बाल: होलिका की अग्नि में भूनें, प्रसाद। सुरक्षा: बच्चों को होलिका के पास सुरक्षित रखें।

होलाष्टक 2026 में क्या करें और क्या न करें?

होलाष्टक 2026 (6-13 मार्च): न करें: विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई दुकान उद्घाटन। न करें: बड़े निर्णय, निवेश। करें: भजन-कीर्तन। भगवान विष्णु और प्रहलाद की पूजा। दान: गरीबों को भोजन। 2026: होलाष्टक 6-13 मार्च 2026।

रंगवाली होली और होलिका दहन में क्या फर्क है?

होलिका दहन बनाम रंगवाली होली: होलिका दहन: 13 मार्च 2026 (रात को)। बुराई का नाश, आग में होलिका दहन। रंगवाली होली: 14 मार्च 2026 (दिन में)। रंग और गुलाल से खेलना। प्रतीक: होलिका दहन = बुराई का नाश। रंगवाली = खुशी और उमंग।

2026 में होली का ज्योतिषीय महत्व?

2026 होली ज्योतिष: 14 मार्च (शनिवार): शनि का दिन। फाल्गुन पूर्णिमा: चंद्रमा पूर्ण। 2026 में: चंद्र ग्रहण 3 मार्च को था, होली 14 मार्च को। बृहस्पति: मेष में (उच्च नहीं), लेकिन 2026 में बाद में उच्च होंगे। होली 2026: उत्सव और सामाजिक मेल-जोल के लिए शुभ।