तीज 2026: श्रावण की हरियाली और शिव-पार्वती
तीज 2026 में तीन प्रमुख पर्व हैं: हरियाली तीज (24 जुलाई, श्रावण शुक्ल तृतीया), कजली/सातुड़ी तीज (7 अगस्त, भाद्रपद कृष्ण तृतीया), और हरतालिका तीज (24 अगस्त, भाद्रपद शुक्ल तृतीया)। पत्नियां इन तीनों तीजों पर पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। माँ पार्वती की पूजा और सोलह श्रृंगार इस त्योहार की पहचान है।
2026 में तीनों तीज की तिथियां
तीज 2026 तिथियां: हरियाली तीज: 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार), श्रावण शुक्ल तृतीया। कजली तीज: 7 अगस्त 2026, भाद्रपद कृष्ण तृतीया। हरतालिका तीज: 24 अगस्त 2026 (सोमवार), भाद्रपद शुक्ल तृतीया।
तीज का महत्व और परंपरा
तीज की परंपराएं: व्रत: निर्जला (हरतालिका) या साहारी (हरियाली)। पूजा: माँ पार्वती और शिव जी की। झूला: पेड़ पर झूला डालना। श्रृंगार: सोलह श्रृंगार, हरे वस्त्र, मेहंदी। गीत: तीज के लोकगीत। मायका: हरियाली तीज पर बेटियां मायके जाती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तीज 2026 में कब-कब है?
तीज 2026 की तारीखें: हरियाली तीज: 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार)। कजली/सातुड़ी तीज: 7 अगस्त 2026। हरतालिका तीज: 24 अगस्त 2026 (सोमवार)। गणेश चतुर्थी: 25 अगस्त (हरतालिका तीज के अगले दिन)।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या फर्क है?
हरियाली तीज बनाम हरतालिका तीज: हरियाली तीज: श्रावण माह में। सावन की हरियाली। उत्तर भारत में मनाते हैं। व्रत: अर्ध निर्जला। खाना-पीना: कुछ लोग फलाहार करते हैं। हरतालिका तीज: भाद्रपद में। निर्जला व्रत (कठिन)। राजस्थान, उत्तर प्रदेश में प्रमुख। पार्वती का शिव को पति रूप में पाने का तप।
हरतालिका तीज का व्रत कैसे करें?
हरतालिका तीज व्रत विधि 2026 (24 अगस्त): एक दिन पहले: स्नान और नियम। व्रत: पूरे दिन और रात निर्जला। पूजा: रेत की माँ पार्वती और शिव बनाएं। सोलह श्रृंगार: हरे वस्त्र, मेहंदी, चूड़ियां। रात भर जागरण: भजन-कीर्तन। सुबह: पूजा के बाद व्रत खोलें।
तीज पर मेहंदी क्यों लगाते हैं?
तीज और मेहंदी: सोलह श्रृंगार: मेहंदी सोलह श्रृंगार में से एक। माँ पार्वती: शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रृंगार किया। सुहाग: मेहंदी सुहाग का प्रतीक है। रंग गहरा = प्रेम गहरा: मान्यता है कि मेहंदी जितनी गहरी हो पति का प्यार उतना गहरा। हरियाली तीज पर: मेहंदी मेले भी लगते हैं।
2026 में हरियाली तीज का ज्योतिषीय महत्व?
2026 हरियाली तीज ज्योतिष: 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार): शुक्र का दिन। शुक्र: पत्नी, प्रेम और सौंदर्य का कारक। सावन: श्रावण माह में। देव शयनी (17 जुलाई): हरियाली तीज देव शयनी के 7 दिन बाद। 2026: बृहस्पति उच्च। विवाहिताओं के लिए: 2026 की हरियाली तीज वैवाहिक जीवन के लिए विशेष शुभ।
कजली तीज क्या है?
कजली/सातुड़ी तीज: भाद्रपद कृष्ण तृतीया (7 अगस्त 2026)। मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रमुख। भाद्रपद: काले रंग की तृतीया। कजली: काले काजल से आंखें सजाने की परंपरा। सातुड़ी: सातू (सत्तू) खाने का व्रत। उत्सव: नीम की पूजा, झूला।
राजस्थान में तीज कैसे मनाते हैं?
राजस्थान की तीज: जयपुर: भव्य तीज शोभायात्रा (राजस्थान पर्यटन का प्रमुख उत्सव)। माँ पार्वती की सवारी: पालकी में माँ की मूर्ति की शोभायात्रा। लोक नृत्य: घूमर, गणगौर। पारंपरिक वेश: राजपूती परिधान। बाजार: तीज से पहले मेहंदी और चूड़ियों का बाजार लगता है।
तीज पर झूला क्यों झूलते हैं?
तीज और झूला: प्रकृति का उत्सव: सावन में झूला झूलना प्रकृति के साथ होने का प्रतीक। पार्वती की खुशी: माँ पार्वती भी सावन में झूला झूलती थीं। मायका: तीज पर बेटियां मायके आती हैं, झूला उनकी बचपन की यादों का हिस्सा। फिल्मी: हिंदी फिल्मों में "झूले में पड़ोसन" जैसे गीत इसी परंपरा से।
तीज व्रत कौन रख सकता है?
तीज व्रत: विवाहित महिलाएं: पति की दीर्घायु के लिए। अविवाहित कन्याएं: अच्छे पति की कामना के लिए। पार्वती की तरह: माँ पार्वती ने शिव को पाने के लिए यह व्रत रखा था। आधुनिक: अब पुरुष भी पत्नी के लिए व्रत रखते हैं। दोनों साथ: जोड़े मिलकर तीज मनाते हैं।