श्रावण 2026: सावन का पवित्र माह
श्रावण (सावन) 2026: 11 जुलाई 2026 से 9 अगस्त 2026 तक। यह भगवान शिव का सबसे प्रिय माह है। इस पूरे महीने शिव पूजा, सोमवार व्रत और अभिषेक का विशेष महत्व है। 2026 में सावन की शुरुआत राहु-केतु के नई राशियों में प्रवेश (18 जुलाई) के साथ मिलती है, जो इसे और भी विशेष बनाती है।
श्रावण 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां
श्रावण 2026 प्रमुख तिथियां: 11 जुलाई: श्रावण माह प्रारंभ। 17 जुलाई: देव शयनी एकादशी (चातुर्मास शुरू)। 18 जुलाई: राहु कुंभ, केतु सिंह (ग्रह परिवर्तन)। 24 जुलाई: हरियाली तीज। 29 जुलाई: नाग पंचमी। 9 अगस्त: श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन)।
सावन में शिव पूजा की विधि
सावन में प्रतिदिन: ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद से अभिषेक। बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल। ओम नमः शिवाय जाप। सावन सोमवार: विशेष व्रत और रुद्राभिषेक।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रावण 2026 कब से कब तक है?
श्रावण 2026: 11 जुलाई 2026 (गुरुवार) से 9 अगस्त 2026 (रविवार) तक। सावन में 4 सोमवार: 13 जुलाई, 20 जुलाई, 27 जुलाई, 3 अगस्त 2026। अतिरिक्त अधिक मास: 2026 में अधिक श्रावण नहीं है, सामान्य एक माह का सावन।
सावन सोमवार 2026 की तिथियां क्या हैं?
सावन सोमवार 2026 की तिथियां: पहला सावन सोमवार: 13 जुलाई 2026। दूसरा सावन सोमवार: 20 जुलाई 2026। तीसरा सावन सोमवार: 27 जुलाई 2026। चौथा सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026। सावन की पूर्णिमा (रक्षा बंधन): 9 अगस्त 2026।
सावन में क्या खाएं और क्या नहीं?
सावन में आहार नियम: खाएं: सात्विक भोजन, फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़ा, कुट्टू। न खाएं: कई लोग सावन में मांस, मछली, प्याज, लहसुन से परहेज करते हैं। सोमवार व्रत में: निर्जला या फलाहार। कारण: वर्षा में जमीन पर सूक्ष्म जीव अधिक होते हैं, सात्विक भोजन उत्तम।
सावन में कांवड़ यात्रा क्या है?
कांवड़ यात्रा 2026: कांवड़: गंगाजल भरकर शिव मंदिरों में अभिषेक करना। कांवड़िए: लाखों श्रद्धालु हरिद्वार या गंगाजी से जल लाकर पैदल यात्रा करते हैं। मुख्य मार्ग: हरिद्वार से मेरठ, दिल्ली, उत्तर प्रदेश के विभिन्न शिव मंदिरों तक। 2026: 11 जुलाई से कांवड़ यात्रा प्रारंभ।
2026 श्रावण में राहु-केतु परिवर्तन का क्या प्रभाव है?
2026 सावन में ग्रह परिवर्तन: 18 जुलाई 2026: राहु कुंभ और केतु सिंह में प्रवेश करेंगे। सावन के बीच में यह ग्रह परिवर्तन: शिव पूजा और राहु-केतु शांति के लिए विशेष अवसर। केतु सिंह में: शिव और सूर्य दोनों को एक साथ पूजने का समय। राहु-केतु शांति के लिए: सावन में रुद्राभिषेक विशेष रूप से फलदायी।
सावन में रुद्राभिषेक क्यों करते हैं?
सावन में रुद्राभिषेक: शिव का प्रिय माह: भगवान शिव सावन में सबसे अधिक प्रसन्न रहते हैं। अभिषेक सामग्री: जल, दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, गंगाजल। मंत्र: रुद्री, महामृत्युंजय मंत्र। फल: सावन में रुद्राभिषेक करने से सभी कष्टों का निवारण, स्वास्थ्य, और मोक्ष मिलता है।
काशी में सावन 2026 कैसा होगा?
काशी (वाराणसी) में सावन 2026: पूरे सावन में: काशी विश्वनाथ मंदिर में 24 घंटे अभिषेक। सोमवार: विशेष भीड़ और आरती। गंगा स्नान: घाटों पर लाखों श्रद्धालु। कांवड़: हरिद्वार से कांवड़ियों का आगमन। बाबा विश्वनाथ मंदिर: 2024 में बने नए कॉरिडोर में 2026 सावन विशेष भव्य।
सावन में हरियाली तीज और नाग पंचमी का महत्व?
सावन के प्रमुख त्योहार 2026: हरियाली तीज (24 जुलाई): महिलाओं का पर्व, शिव-पार्वती मिलन। नाग पंचमी (29 जुलाई): नाग देवता पूजा, काल सर्प दोष शांति। रक्षा बंधन (9 अगस्त): सावन पूर्णिमा, भाई-बहन का पर्व। देव शयनी एकादशी (17 जुलाई): चातुर्मास प्रारंभ।
सावन सोमवार का व्रत कैसे करें?
सावन सोमवार व्रत विधि: सुबह: ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान और संकल्प। शिव पूजा: शिवलिंग पर अभिषेक और बेलपत्र। व्रत: दिनभर निर्जला या एक समय फलाहार। संध्या आरती: शाम को शिव आरती। पारण: अगले दिन स्नान के बाद प्रसाद से व्रत खोलें। 4 सोमवार: सावन के सभी सोमवार व्रत रखना विशेष पुण्यकारी।