वट सावित्री 2026: सौभाग्य का पर्व

वट सावित्री 2026: 26 मई 2026 (मंगलवार), ज्येष्ठ अमावस्या। यह व्रत सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सुख के लिए रखती हैं। महान सती सावित्री ने इसी दिन अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस लाई थी।

वट सावित्री 2026 की तिथि

वट सावित्री 2026 (अमावस्या): 26 मई 2026 (मंगलवार)। उत्तर भारत में: अमावस्या पर। दक्षिण भारत और पूर्णिमा परंपरा: 22-23 मई (ज्येष्ठ पूर्णिमा) पर।

वट सावित्री पूजा विधि

बरगद का पेड़: बरगद (वट वृक्ष) की पूजा करें। धागा लपेटें: बरगद को 5, 7 या 11 बार धागे से लपेटें। भोग: नारियल, सुपारी, पान, बेर, आंवला। मंत्र: ओम वटमूलाय नमः। सावित्री कथा: व्रत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वट सावित्री 2026 कब है?

वट सावित्री 2026: उत्तर भारत (अमावस्या): 26 मई 2026 (मंगलवार)। दक्षिण भारत (पूर्णिमा): 22 मई 2026। 2026 में मंगलवार को वट सावित्री: मंगल शक्ति और विवाह शक्ति का योग - विवाहित स्त्रियों के लिए विशेष शुभ।

वट सावित्री व्रत कौन रख सकती है?

वट सावित्री व्रत: मुख्यतः सुहागिन स्त्रियां (विवाहित महिलाएं) यह व्रत रखती हैं। उद्देश्य: पति की दीर्घायु, सुख और परिवार का सौभाग्य। कन्याएं: अच्छे वर के लिए यह व्रत रख सकती हैं।

सावित्री-सत्यवान की कथा क्या है?

सावित्री-सत्यवान कथा: मद्र देश की राजकुमारी सावित्री ने जंगल में रहने वाले निर्धन राजकुमार सत्यवान से विवाह किया। ऋषि नारद ने बताया कि सत्यवान की आयु केवल एक वर्ष है। एक वर्ष बाद: यमराज सत्यवान को लेने आए। सावित्री यमराज के पीछे गई और अपनी बुद्धिमत्ता से तीन वरदान मांगे, तीसरे वरदान में पुत्र प्राप्ति मांगी जो बिना पति के संभव नहीं था। यमराज को सत्यवान को जीवित करना पड़ा।

वट सावित्री पर बरगद की पूजा क्यों?

वट (बरगद) वृक्ष का महत्व: त्रिमूर्ति का वास: बरगद की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास। अमरत्व का प्रतीक: बरगद सैकड़ों वर्ष जीता है, इसलिए पति की दीर्घायु के लिए इसकी पूजा। सावित्री कथा: सावित्री ने बरगद के पेड़ के नीचे पति को जीवित किया था।

वट सावित्री का उद्यापन कैसे करें?

वट सावित्री उद्यापन (व्रत पूर्ण करना): 3, 5 या 7 साल बाद उद्यापन करें। सुहागिनों को भोजन कराएं। सुहाग सामग्री दान: सिंदूर, चूड़ी, बिछिया, बेदाग की थाली। ब्राह्मण दक्षिणा। वट वृक्ष की विशेष पूजा और 108 परिक्रमा।

वट सावित्री और करवा चौथ में क्या अंतर है?

वट सावित्री और करवा चौथ: करवा चौथ: कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को, उत्तर भारत में मुख्यतः। चंद्र को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। वट सावित्री: ज्येष्ठ में, बरगद की पूजा। दोनों: पति की दीर्घायु के लिए। दोनों में अंतर: करवा चौथ में चंद्र केंद्रीय, वट सावित्री में बरगद और सावित्री कथा केंद्रीय।

वट सावित्री के प्रसाद में क्या बनाएं?

वट सावित्री प्रसाद: बेर: सावित्री को बेर विशेष प्रिय है। आंवला: परंपरागत प्रसाद। नारियल: पूजा में अर्पित करें। पान-सुपारी: पूजा सामग्री। खीर: गृहलक्ष्मी के लिए विशेष भोग।

वट सावित्री 2026 में ज्योतिषीय महत्व क्या है?

2026 वट सावित्री ज्योतिष: मंगलवार + अमावस्या: मंगल विवाह शक्ति का कारक और अमावस्या पितृ शक्ति का समय। शुक्र मीन में (उच्च): ज्येष्ठ में शुक्र का मीन से प्रस्थान, लेकिन वृष में प्रवेश: विवाह और सौभाग्य को बल। 2026 में मंगलवार को वट सावित्री पड़ना: मंगल बल से व्रत का फल दोगुना।

नई विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत में क्या सावधानी रखें?

नवविवाहित के लिए वट सावित्री: पहला वट सावित्री व्रत: सास या कोई अनुभवी महिला के साथ करें। व्रत: निर्जला या जल सहित (अपनी क्षमता अनुसार)। सुहाग सामग्री: लाल साड़ी या चुनरी, सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मंगलसूत्र पहनें। कथा: पूरी सावित्री कथा सुनें। पारण: शाम को बरगद को जल अर्पित करने के बाद।