अहोई अष्टमी 2026: पुत्रों के लिए माता का व्रत

अहोई अष्टमी 2026: 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार), कार्तिक कृष्ण अष्टमी। करवा चौथ के ठीक 4 दिन बाद। माताएं अपने पुत्रों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को तारे देखकर या चंद्रमा देखकर व्रत खोलते हैं।

अहोई अष्टमी 2026 की तिथि

अहोई अष्टमी 2026: 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार)। कार्तिक कृष्ण अष्टमी। करवा चौथ: 10 अक्टूबर 2026। धनतेरस: 20 अक्टूबर। दीपावली: 21 अक्टूबर। अहोई अष्टमी: दीपावली से 7 दिन पहले।

अहोई अष्टमी की पूजा

अहोई माता की पूजा: दीवार पर चित्र: अहोई माता और साही (साही परिवार) का चित्र। पूजा: फूल, रोली, अक्षत, जल। व्रत: निर्जला (पानी बिना)। तारे को अर्घ्य: शाम को आकाश में तारा दिखने पर। करवा से: जल अर्पण। व्रत खोलना: तारे के बाद भोजन।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहोई अष्टमी 2026 कब है?

अहोई अष्टमी 2026: 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार)। कार्तिक कृष्ण अष्टमी। करवा चौथ (10 अक्टूबर) के 4 दिन बाद।

अहोई अष्टमी व्रत कौन रखता है?

अहोई अष्टमी व्रत: माताएं: पुत्रों की दीर्घायु के लिए। पत्नियां: पति के भाइयों (देवर) के लिए भी कुछ महिलाएं। उत्तर भारत: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा में प्रमुख। पुत्री के लिए: कुछ क्षेत्रों में पुत्रियों के लिए भी रखते हैं। आधुनिक: सभी बच्चों की लंबी उम्र के लिए।

अहोई अष्टमी व्रत कथा क्या है?

अहोई अष्टमी की कथा: एक स्त्री जंगल में मिट्टी खोद रही थी। गलती से: साही के बच्चों को चोट लगी। साही ने श्राप दिया: तुम्हारे भी बच्चे मर जाएंगे। स्त्री के बच्चे मरने लगे। पश्चाताप: उसने अहोई माता का व्रत रखा। माता प्रसन्न हुईं: बच्चे वापस मिले। तब से: अहोई अष्टमी व्रत की परंपरा।

अहोई माता कौन हैं?

अहोई माता: देवी दुर्गा का एक रूप। "अहोई" = "अनहोनी हो जाई" का अपभ्रंश (बच्चों की अनहोनी दूर करने वाली)। अहोई माता का चित्र: आठ कोने वाला (अष्टकोणीय) बना होता है जिसमें साही और उसके बच्चों का चित्र होता है। उत्तर भारत: यह व्रत उत्तर भारत में बहुत प्रचलित है।

अहोई अष्टमी पर क्या खाएं व्रत में?

अहोई अष्टमी व्रत आहार: यह निर्जला व्रत है। रात को: तारे देखकर व्रत खोलते हैं। पहला भोजन: हल्वा, पूरी, खीर। माता को भोग: मेवा, मिठाई, फल। यदि निर्जला न हो सके: फलाहार कर सकते हैं। व्रत खोलते समय: पुत्र के हाथ से जल ग्रहण करें।

अहोई अष्टमी पर तारे को अर्घ्य क्यों देते हैं?

तारे को अर्घ्य: संध्या समय: पहला तारा दिखने पर करवे (मिट्टी का पात्र) से जल अर्पण। पूजा: अहोई माता के चित्र के सामने। कथा: अहोई माता की कथा सुनें। ताम्बूल: पान का बीड़ा। आरती: अहोई माता की आरती। व्रत खोलना: तारे का दर्शन करके।

करवा चौथ और अहोई अष्टमी में क्या अंतर है?

करवा चौथ बनाम अहोई अष्टमी: करवा चौथ: पत्नी पति के लिए, चतुर्थी को। अहोई अष्टमी: माता पुत्र के लिए, अष्टमी को। करवा चौथ: चंद्रमा देखकर व्रत खोलते हैं। अहोई अष्टमी: तारे (या चंद्रमा) देखकर। दोनों: कार्तिक माह में, 4 दिन के अंतर पर।

2026 में अहोई अष्टमी का ज्योतिषीय महत्व?

2026 अहोई अष्टमी ज्योतिष: बुधवार: बुध बच्चों और बुद्धि का कारक। कार्तिक कृष्ण अष्टमी: चंद्रमा कम। 2026 में: दीपावली क्लस्टर (14-23 अक्टूबर) के बीच में। बृहस्पति उच्च: संतानों के लिए बृहस्पति की कृपा।

अहोई अष्टमी पर साही की क्यों पूजा होती है?

साही और अहोई अष्टमी: साही (Hedgehog/Porcupine): कांटेदार जानवर। व्रत कथा: साही के बच्चों की हत्या से श्राप, माफी और व्रत। प्रतीक: साही का परिवार = अपने बच्चों की रक्षा। पूजा: दीवार पर साही और उसके परिवार का चित्र बनाकर। उपहार: साही परिवार के चित्र पर दूध, चावल, मेवा।