अमावस्या 2026: सम्पूर्ण तिथि सूची और महत्व
अमावस्या प्रत्येक माह की वह तिथि है जब चंद्रमा अदृश्य होता है। हिंदू परंपरा में अमावस्या पितरों (पूर्वजों) की पूजा, तर्पण और शांति के लिए सर्वोत्तम दिन है। 2026 में 12 अमावस्या तिथियां हैं जिनमें सोमवती अमावस्या, सर्वपितृ अमावस्या और हरियाली अमावस्या विशेष महत्वपूर्ण हैं।
2026 की सभी अमावस्या तिथियां
2026 अमावस्या सूची: जनवरी: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)। फरवरी: 28 फरवरी 2026 (शनिवार)। मार्च: 29 मार्च 2026 (रविवार)। अप्रैल: 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार)। मई: 26 मई 2026 (मंगलवार)। जून: 25 जून 2026 (गुरुवार)। जुलाई: 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार)। अगस्त: 23 अगस्त 2026 (रविवार)। सितंबर: 19 सितंबर 2026 (शनिवार, सर्वपितृ अमावस्या)। अक्टूबर: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार, दीपावली)। नवंबर: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार)। दिसंबर: 20 दिसंबर 2026 (रविवार)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2026 की सोमवती अमावस्या कब है?
2026 में सोमवती अमावस्या (सोमवार को आने वाली अमावस्या): 2026 में कोई अमावस्या सोमवार को नहीं पड़ती है। निकटतम: 29 जनवरी (गुरुवार)। अगली सोमवती अमावस्या: 2027 में। सोमवती अमावस्या का महत्व: सोमवती अमावस्या अत्यंत दुर्लभ और शुभ होती है।
2026 की सर्वपितृ अमावस्या कब है?
सर्वपितृ अमावस्या 2026: 19 सितंबर 2026 (शनिवार), पितृ पक्ष का अंतिम दिन। यह सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या है जब सभी पितरों का एक साथ तर्पण और श्राद्ध किया जा सकता है। शनिवार + अमावस्या: शनि पितृ दोष शांति के लिए विशेष प्रभावी।
अमावस्या पर तर्पण कैसे करें?
अमावस्या तर्पण विधि: सुबह: पवित्र नदी में या घर पर स्नान। दक्षिण दिशा: दक्षिण दिशा में मुख करके तर्पण करें। काले तिल: जल में काले तिल मिलाएं। अंजली: दोनों हाथों की अंजली से जल दें। मंत्र: ओम (पितृ का नाम) प्रेताय तृप्यताम्। तीन बार: तीन बार तर्पण दें।
दीपावली 2026 की अमावस्या पर क्या करें?
दीपावली अमावस्या 2026: 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार)। दीपावली अमावस्या का महत्व: माता लक्ष्मी पूजा, दीप जलाना। यह वर्ष की सबसे उत्सव वाली अमावस्या है। पितृ तर्पण: सुबह तर्पण दें। शाम: लक्ष्मी पूजा और दीप दान। धन: इस अमावस्या पर लक्ष्मी पूजा से वर्षभर समृद्धि।
अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?
अमावस्या पर वर्जित: शुभ कार्य: शादी, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य न करें। नई खरीद: कुछ परंपराओं में वाहन या घर की नई खरीद वर्जित। मांसाहार: पितरों का दिन होने से मांसाहार उचित नहीं। विशेष ध्यान: अमावस्या नकारात्मक ऊर्जा अधिक होती है, सावधान रहें।
अमावस्या और पितृ दोष का क्या संबंध है?
अमावस्या और पितृ दोष: पितृ दोष: जब पितरों की आत्माएं तृप्त नहीं होतीं तो पितृ दोष होता है। हर अमावस्या: पितृ तर्पण देना पितृ दोष शांति का नियमित उपाय। सर्वपितृ अमावस्या (19 सितंबर 2026): वार्षिक विशेष तर्पण। पितृ दोष लक्षण: परिवार में बार-बार बीमारी, संतान में बाधा, व्यापार में हानि।
अमावस्या को गाय माता का दान क्यों करें?
अमावस्या पर गाय को दान: पितरों का मार्ग: गाय की पीठ पर पितरों का वास माना जाता है। गाय को भोजन: अमावस्या पर गाय को रोटी, गुड़ खिलाना पितृ तर्पण के समान। कौवे को भोजन: कौवे को भी भोजन दें (पितरों का प्रतीक)। दान: अमावस्या पर गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करें।
2026 में कौन सी अमावस्या सबसे महत्वपूर्ण है?
2026 की सबसे महत्वपूर्ण अमावस्या: सर्वपितृ अमावस्या (19 सितंबर): पितृ पक्ष का अंतिम दिन, सबसे महत्वपूर्ण पितृ तर्पण। दीपावली अमावस्या (21 अक्टूबर): लक्ष्मी पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ। वट सावित्री अमावस्या (26 मई): विवाहित महिलाओं के लिए। हरियाली अमावस्या (24 जुलाई): श्रावण माह में।
अमावस्या पर साधना का क्या फल है?
अमावस्या साधना: अमावस्या की रात: तंत्र और साधना के लिए विशेष समय। ध्यान: अमावस्या पर ध्यान और प्राणायाम विशेष फलदायी। काली पूजा: अमावस्या देवी काली की पूजा का समय। शिव पूजा: अमावस्या पर शिव का निशीथकाल रूद्राभिषेक। ध्यान रखें: अमावस्या साधना अनुभवी गुरु के मार्गदर्शन में करें।