कलश स्थापना मुहूर्त 2026: नवरात्रि घटस्थापना

कलश स्थापना (घटस्थापना) नवरात्रि के पहले दिन की जाती है। 2026 में दो नवरात्रि हैं: चैत्र नवरात्रि (30 मार्च - 7 अप्रैल 2026) और शारदीय नवरात्रि (22 सितंबर - 1 अक्टूबर 2026)। प्रतिपदा के दिन शुभ लग्न में कलश स्थापना करने से माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिलता है।

कलश स्थापना 2026 की तिथियां

कलश स्थापना 2026: चैत्र नवरात्रि: 30 मार्च 2026 (सोमवार)। शुभ मुहूर्त: सूर्योदय से पहले या अभिजित मुहूर्त (दोपहर 12 बजे)। शारदीय नवरात्रि: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार)। मंगलवार: माँ दुर्गा का दिन। शुभ लग्न: वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ।

कलश स्थापना की सामग्री

कलश स्थापना सामग्री: मिट्टी का कलश: मिट्टी का घट (मटका)। रेत या जौ: जमीन में बोने के लिए। पंचपल्लव: 5 पवित्र पत्तियां। गंगाजल: कलश में भरने के लिए। नारियल: कलश के ऊपर। रोली, अक्षत, फूल। चंदन, धूप, दीप। माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलश स्थापना 2026 में कब है?

कलश स्थापना 2026: चैत्र नवरात्रि: 30 मार्च 2026 (सोमवार), चैत्र शुक्ल प्रतिपदा। शारदीय नवरात्रि: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार), आश्विन शुक्ल प्रतिपदा।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

कलश स्थापना मुहूर्त: सर्वोत्तम: प्रातःकाल, सूर्योदय के बाद (अरुणोदय काल)। अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:30 से 12:30 बजे। जब तक: प्रतिपदा तिथि हो। वर्जित: राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल। 22 सितंबर 2026 शुभ लग्न: मंगलवार को कुंभ या वृषभ लग्न खोजें।

कलश स्थापना कैसे करते हैं?

कलश स्थापना विधि: जौ बोना: मिट्टी के पात्र में जौ या अन्न बोएं (समृद्धि का प्रतीक)। कलश: मिट्टी या तांबे का कलश रखें। गंगाजल भरें: कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का, पंचपल्लव। कलश के मुख पर: अक्षत और नारियल। माँ दुर्गा: कलश के पास दुर्गा जी की तस्वीर। पूजा: रोली, फूल, धूप, दीप।

क्या कलश स्थापना में नारियल को कैसे रखें?

कलश पर नारियल: नारियल रखना: कलश के मुख पर अक्षत बिखराकर नारियल रखें। जटाएं: नारियल की जटाएं ऊपर रहें। लाल कपड़ा: नारियल पर लाल कपड़ा लपेटें। आम की पत्तियां: कलश के मुख पर 5-7 आम की पत्तियां। उद्देश्य: नारियल = ब्रह्मा, विष्णु, महेश।

नवरात्रि में कलश स्थापना क्यों जरूरी है?

कलश स्थापना का महत्व: माँ दुर्गा का आह्वान: कलश में माँ का आगमन। नौ दिन व्रत: कलश स्थापित रहता है। जौ उगना: नवमी तक जौ उग जाते हैं, यह शुभ संकेत है। विसर्जन: दशमी को माँ की विदाई। ऊर्जा: कलश घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या फर्क है?

दो नवरात्रियां 2026: चैत्र नवरात्रि (30 मार्च - 7 अप्रैल): वसंत ऋतु, चैत्र माह। राम नवमी: चैत्र शुक्ल नवमी को। शारदीय नवरात्रि (22 सितंबर - 1 अक्टूबर): शरद ऋतु, आश्विन माह। दशहरा: नवमी/दशमी को। दोनों में: माँ दुर्गा के 9 रूपों की पूजा।

कलश स्थापना के बाद क्या करें?

कलश स्थापना के बाद: नौ दिन तक: दैनिक पूजा, दुर्गा चालीसा पाठ। व्रत: फलाहार या एक समय भोजन। अखंड ज्योति: दीपक जलाएं (बुझने न दें)। अष्टमी-नवमी: कन्या पूजन। दशमी (दशहरा): कलश विसर्जन और माँ की विदाई। जौ: नवमी के जौ को बाल अपने कानों में लगाते हैं।

2026 में शारदीय नवरात्रि कलश स्थापना विशेष क्यों?

2026 शारदीय नवरात्रि ज्योतिष: 22 सितंबर 2026 (मंगलवार): माँ दुर्गा और मंगल दोनों शक्ति के। बृहस्पति उच्च (कर्क): धर्म की विजय। 2026 दशहरा (1 अक्टूबर): गुरुवार + बृहस्पति उच्च + दशमी। नवरात्रि से दशहरा तक: 2026 का यह क्लस्टर असाधारण रूप से शुभ।

कलश स्थापना में कौन सा कलश शुभ है?

कलश की सामग्री: सर्वोत्तम: चांदी का कलश। उत्तम: तांबे का कलश। अच्छा: पीतल या मिट्टी का कलश। न करें: लोहे का कलश। रंग: लाल या पीले कपड़े से सजाएं। आकार: घर के अनुपात में (बहुत बड़ा या बहुत छोटा नहीं)।