तुलसी विवाह 2026: देव उठनी के बाद का शुभारंभ

तुलसी विवाह 2026: 23 नवंबर 2026 (सोमवार), कार्तिक शुक्ल द्वादशी। देव उठनी एकादशी (22 नवंबर) के अगले दिन तुलसी-शालिग्राम विवाह होता है। इस विवाह के बाद से विवाह मुहूर्त और सभी शुभ कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।

तुलसी विवाह 2026 की तिथि

तुलसी विवाह 2026: 23 नवंबर 2026 (सोमवार), कार्तिक शुक्ल द्वादशी। देव उठनी एकादशी: 22 नवंबर 2026। तुलसी विवाह: 23 नवंबर 2026।

तुलसी विवाह पूजा विधि

तुलसी को सजाएं: लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर। शालिग्राम: विष्णु के प्रतीक, भगवान कृष्ण स्वरूप। मंडप: गन्ने से मंडप बनाएं। फेरे: तुलसी-शालिग्राम के 4 फेरे। मंत्र: "ओम तुलस्यै नमः" और विष्णु मंत्र। आरती और भोग।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तुलसी विवाह 2026 कब है?

तुलसी विवाह 2026: 23 नवंबर 2026 (सोमवार), कार्तिक शुक्ल द्वादशी। देव उठनी एकादशी (22 नवंबर) के एक दिन बाद। 2026 में सोमवार को तुलसी विवाह: सोमवार शिव का दिन, तुलसी विष्णु की प्रिया - दोनों देव एक साथ।

तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

तुलसी विवाह का महत्व: पौराणिक कथा: तुलसी (वृंदा) भगवान विष्णु की परम भक्त थीं। विष्णु ने उन्हें वरदान दिया: तुम्हारा विवाह मेरे साथ होगा। देव उठनी के बाद: इस विवाह के साथ विवाह मुहूर्त प्रारंभ होते हैं। फल: जो तुलसी विवाह करता है उसे कन्यादान के समान पुण्य मिलता है।

तुलसी विवाह में क्या सामग्री चाहिए?

तुलसी विवाह सामग्री: तुलसी का पौधा, शालिग्राम (विष्णु का प्रतीक पत्थर), गन्ना (मंडप), आंवला, बेर, फल, लाल चुनरी, चूड़ी, सिंदूर, मेंहदी, पान-सुपारी, नारियल। भोग: खीर, पंचामृत, मिठाई।

तुलसी विवाह के बाद विवाह मुहूर्त कब से शुरू होते हैं?

तुलसी विवाह के बाद मुहूर्त: चातुर्मास (आषाढ़ से कार्तिक) में विवाह वर्जित होते हैं। देव उठनी एकादशी (22 नवंबर 2026) से चातुर्मास समाप्त। तुलसी विवाह (23 नवंबर 2026) के बाद: विवाह मुहूर्त प्रारंभ। नवंबर-दिसंबर 2026: विवाह के उत्तम मुहूर्त।

क्या घर पर तुलसी विवाह कर सकते हैं?

घर पर तुलसी विवाह: हां, घर पर पूरे विधि-विधान से तुलसी विवाह कर सकते हैं। तुलसी का पौधा: घर के आंगन या बालकनी में हो। शालिग्राम: मंदिर से या धार्मिक दुकान से लाएं। परिवार: परिवार के सभी सदस्य मिलकर करें। प्रसाद: पड़ोसियों को भी बांटें।

तुलसी विवाह और कार्तिक माह का क्या संबंध है?

कार्तिक माह और तुलसी: कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर): विष्णु का प्रिय माह। तुलसी: विष्णु की प्रिया। कार्तिक में तुलसी पूजा: प्रतिदिन तुलसी के पौधे में दीपक जलाना। तुलसी विवाह: कार्तिक के अंतिम दिनों में। कार्तिक स्नान: कार्तिक पूर्णिमा तक पवित्र नदी में स्नान।

तुलसी विवाह पर कौन से मंत्र जपें?

तुलसी विवाह मंत्र: तुलसी मंत्र: ओम तुलस्यै नमः। विष्णु मंत्र: ओम नमो भगवते वासुदेवाय। विवाह मंत्र: श्री तुलसी शालिग्राम विवाह शुभे शुभे। प्रसाद मंत्र: तुलसी माता विष्णु प्रिया, जगत पावनी।

तुलसी विवाह 2026 में ज्योतिषीय महत्व?

2026 तुलसी विवाह ज्योतिष: सोमवार: शिव और चंद्र का दिन। बृहस्पति उच्च (कर्क): विष्णु और तुलसी दोनों के लिए शुभ। देव उठनी के एक दिन बाद: विष्णु के जागरण का उत्साह अभी ताजा। 2026 में तुलसी विवाह: बृहस्पति उच्च के कारण यह विवाह और अगले विवाह मुहूर्त विशेष फलदायी।

तुलसी के बिना विष्णु पूजा क्यों अधूरी है?

तुलसी और विष्णु: विष्णु पुराण: भगवान विष्णु ने स्वयं कहा कि बिना तुलसी के पूजा स्वीकार नहीं। तुलसी के गुण: तुलसी में एंटीबैक्टीरियल गुण, विज्ञान से भी प्रमाणित। धार्मिक महत्व: हर भोग और प्रसाद में तुलसी दल अनिवार्य। तुलसी की माला: जप के लिए श्रेष्ठ।