दिसंबर 2026 पंचांग: हिंदू कैलेंडर

हिंदी माह: मार्गशीर्ष-पौष | मुख्य: गीता जयंती (8 दिसंबर), मोक्षदा एकादशी, धनुर्मास शुरू (21 दिसंबर), विवाह मुहूर्त (1-20)

तिथित्योहार / कार्यक्रमविशेष
1 दिसंबरमार्गशीर्ष पूर्णिमाकार्तिक मास की समाप्ति
8 दिसंबरगीता जयंती / मोक्षदा एकादशीभगवद्गीता की वर्षगांठ, मोक्ष प्राप्ति का दिन
16 दिसंबरमार्गशीर्ष अमावस्यापितृ तर्पण
21 दिसंबरधनुर्मास प्रारंभ (सूर्य धनु राशि में)विवाह मुहूर्त बंद (14 जनवरी 2027 तक)
22 दिसंबरशीतकालीन अयनांत (Winter Solstice)वर्ष का सबसे छोटा दिन
23 दिसंबरदत्तात्रेय जयंती / मार्गशीर्ष पूर्णिमाभगवान दत्तात्रेय की जयंती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता जयंती 2026 कब है?

गीता जयंती 2026: 8 दिसंबर 2026 (मंगलवार), मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी (मोक्षदा एकादशी)। इस दिन भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को भगवद्गीता का ज्ञान दिया था। इस दिन: सम्पूर्ण भगवद्गीता का पाठ करें। कुरुक्षेत्र में लाखों श्रद्धालु आते हैं। गीता उपहार: किसी को भगवद्गीता का उपहार दें।

धनुर्मास 2026 में कब शुरू होगा?

धनुर्मास (खर मास) 2026: शुरुआत: 21 दिसंबर 2026 (सूर्य का धनु में प्रवेश)। समाप्ति: 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति पर सूर्य मकर में)। इस अवधि में: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, और अन्य शुभ संस्कार वर्जित। धनुर्मास में क्या करें: पूजा-पाठ, तीर्थ यात्रा, धार्मिक ग्रंथ पढ़ें। मकर संक्रांति के बाद: सभी शुभ कार्य पुनः शुरू।

दिसंबर 2026 में विवाह मुहूर्त कब तक हैं?

दिसंबर 2026 विवाह मुहूर्त: उपलब्ध: 1 दिसंबर से 20 दिसंबर 2026 (धनुर्मास से पहले)। संभावित तिथियां: 3, 7, 10, 14, 17, 20 दिसंबर। 21 दिसंबर के बाद: धनुर्मास में विवाह नहीं। अगला विवाह सीजन: 14 जनवरी 2027 (मकर संक्रांति) के बाद। विशेष: 2026 के समस्त विवाह के लिए बृहस्पति का उच्च में होना अत्यंत शुभ।

मोक्षदा एकादशी 2026 का क्या महत्व है?

मोक्षदा एकादशी 2026: 8 दिसंबर 2026, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी। 'मोक्षदा' अर्थात मोक्ष देने वाली एकादशी। इस दिन व्रत रखकर पुण्य अर्जित करने से पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। गीता जयंती के साथ मेल: इस दिन भगवान कृष्ण और गीता की पूजा करने से अक्षय पुण्य मिलता है।

दत्तात्रेय जयंती 2026 कब है?

दत्तात्रेय जयंती 2026: 23 दिसंबर 2026 (बुधवार), मार्गशीर्ष पूर्णिमा। भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा, विष्णु और शिव के संयुक्त अवतार हैं। नाथ सम्प्रदाय के आराध्य। महाराष्ट्र के गाणगापुर और नरसोबावाडी में विशाल उत्सव। 'दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा' भजन से पूजा।

दिसंबर 2026 में ग्रह स्थिति कैसी रहेगी?

दिसंबर 2026 ग्रह स्थिति: सूर्य: वृश्चिक से धनु में (21 दिसंबर)। बृहस्पति: कर्क में उच्च (सम्पूर्ण दिसंबर)। शनि: कुंभ में। राहु: कुंभ में (18 जुलाई से)। केतु: सिंह में। बुध: संभवतः वृश्चिक/धनु क्षेत्र। शुक्र: वृश्चिक या धनु में। मंगल: कुंभ/मीन के आसपास। कोई वक्री ग्रह नहीं: दिसंबर 2026 में कोई बड़ा वक्री नहीं।

दिसंबर 2026 में शीतकालीन अयनांत का ज्योतिषीय महत्व क्या है?

शीतकालीन अयनांत (Winter Solstice) 2026: 22 दिसंबर 2026। उत्तरी गोलार्द्ध में वर्ष का सबसे छोटा दिन। वैदिक ज्योतिष में: अयनांत वह बिंदु जहां सूर्य दक्षिणायन (दक्षिण दिशा की ओर) से उत्तरायण (उत्तर दिशा) की ओर मुड़ता है। मकर संक्रांति (14 जनवरी 2027): वैदिक परंपरा में उत्तरायण का आधिकारिक उत्सव (सायन और निरायन अंतर के कारण 23 दिन की देरी)। इसके बाद: दिन बड़े होने लगते हैं।

दिसंबर 2026 में ध्यान और साधना के लिए कौन सा समय शुभ है?

दिसंबर 2026 में साधना के लिए: धनुर्मास (21 दिसंबर - 14 जनवरी 2027): आध्यात्मिक साधना का श्रेष्ठ काल। मार्गशीर्ष माह (1-21 दिसंबर): कृष्ण भक्ति का सर्वोत्तम समय। ब्रह्ममुहूर्त (प्रातः 4-6 बजे): ध्यान और जाप के लिए। अमावस्या (16 दिसंबर): पितृ तर्पण और अंतर्ध्यान। पूर्णिमा (23 दिसंबर): दत्तात्रेय जयंती, संपूर्ण पूर्णिमा ध्यान।

दिसंबर 2026 के पंचांग में विशेष एकादशियां कौन सी हैं?

दिसंबर 2026 एकादशियां: मोक्षदा एकादशी: 8 दिसंबर 2026 (मार्गशीर्ष शुक्ल, गीता जयंती के साथ, मोक्ष के लिए सर्वोत्तम)। सफला एकादशी: 22 दिसंबर 2026 (पौष कृष्ण, कामनाओं की पूर्ति के लिए)। दोनों एकादशियों पर: उपवास, विष्णु पूजा, और तुलसी दल अर्पण। मोक्षदा एकादशी पर भगवद्गीता का अखंड पाठ विशेष रूप से पुण्यकारी।