जुलाई 2026 पंचांग: हिंदू कैलेंडर

हिंदी माह: आषाढ़-श्रावण | मुख्य: गुरु पूर्णिमा, देव शयनी एकादशी, राहु-केतु परिवर्तन (18 जुलाई), श्रावण मास प्रारंभ

तिथित्योहार / कार्यक्रमविशेष
4 जुलाईगुरु पूर्णिमा / आषाढ़ पूर्णिमागुरु पूजन, ज्ञान दान
10 जुलाईशुक्र वक्री प्रारंभ (सिंह में)6 सितंबर तक वक्री, विवाह-खरीद से बचें
17 जुलाईदेव शयनी एकादशीचातुर्मास शुरू, विवाह मुहूर्त बंद
18 जुलाईराहु-केतु परिवर्तन: राहु कुंभ, केतु सिंह मेंऐतिहासिक ग्रह परिवर्तन
19 जुलाईआषाढ़ अमावस्यापितृ तर्पण
21 जुलाईश्रावण मास प्रारंभ (उत्तर भारत)शिव पूजा का पवित्र मास
24 जुलाईश्रावण शिवरात्रि (मासिक)वर्ष की सबसे शक्तिशाली मासिक शिवरात्रि
27 जुलाईहरियाली तीजश्रावण शुक्ल तृतीया, पार्वती-शिव पर्व

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जुलाई 2026 पंचांग में सबसे महत्वपूर्ण तिथि कौन सी है?

जुलाई 2026 में सबसे महत्वपूर्ण तिथियां: 18 जुलाई 2026: राहु-केतु का 18 महीने में एक बार होने वाला ऐतिहासिक परिवर्तन (राहु कुंभ, केतु सिंह में)। 17 जुलाई: देव शयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू। 4 जुलाई: गुरु पूर्णिमा। 21 जुलाई: श्रावण मास शुरू।

जुलाई 2026 में गुरु पूर्णिमा कब है?

गुरु पूर्णिमा 2026 का दिन 4 जुलाई 2026 (शनिवार), आषाढ़ पूर्णिमा। इस दिन अपने गुरु और शिक्षक को प्रणाम करें। 2026 में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व: बृहस्पति (गुरु ग्रह) अपनी उच्च राशि कर्क में है, जो गुरु पूर्णिमा को और भी पवित्र बनाता है। विष्णु सहस्रनाम और गुरु पूजा के लिए श्रेष्ठ दिन।

देव शयनी एकादशी 2026 कब है और इसका क्या महत्व है?

देव शयनी एकादशी 2026: 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार), आषाढ़ शुक्ल एकादशी। इस दिन से भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में जाते हैं (चातुर्मास)। चातुर्मास में: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ संस्कार स्थगित। देव उठनी एकादशी 22 नवंबर 2026 तक। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक के चार पवित्र महीने।

जुलाई 2026 में श्रावण मास कब से शुरू होता है?

श्रावण मास 2026: उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग): 21 जुलाई से 20 अगस्त 2026। दक्षिण भारत और गुजरात (अमांत पंचांग): 19 जुलाई से 17 अगस्त 2026। श्रावण सोमवार: 27 जुलाई, 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त 2026। श्रावण में शिव पूजा, कांवड़ यात्रा और मनोकामना पूर्ति के लिए सोमवार व्रत विशेष।

जुलाई 2026 में शुक्र वक्री का क्या असर होगा?

शुक्र वक्री 10 जुलाई 2026 से शुरू होगा (6 सितंबर 2026 तक)। इस अवधि में: नई कार, बाइक, सोना, विलासिता की खरीद से बचें। विवाह और नए प्रेम संबंध से बचें। पुराने रिश्तों की समीक्षा का समय। फैशन और सौंदर्य व्यवसाय में नए कदम न उठाएं। जो काम 10 जुलाई से पहले करने हैं, वे पहले निपटाएं।

18 जुलाई 2026 का राहु-केतु परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण है?

18 जुलाई 2026 को 18 महीनों में एक बार राहु-केतु राशि बदलते हैं: राहु: मीन से कुंभ में। केतु: कन्या से सिंह में। कुंभ में राहु: तकनीकी क्रांति, सामाजिक परिवर्तन, डिजिटल युग में नई उछाल। सिंह में केतु: अहंकार का परित्याग, आत्म-जागृति, रचनात्मक आध्यात्मिकता। सर्वाधिक प्रभावित राशियां: कुंभ और सिंह।

हरियाली तीज 2026 कब है?

हरियाली तीज 2026: 27 जुलाई 2026 (सोमवार), श्रावण शुक्ल तृतीया। हरियाली तीज पर सुहागिनें हरे वस्त्र पहनती हैं और पार्वती-शिव की पूजा करती हैं। तीज व्रत: विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। झूला उत्सव: इस दिन झूले लगाए जाते हैं, लोकगीत गाए जाते हैं। राजस्थान और उत्तर प्रदेश में विशेष उत्सव।

जुलाई 2026 में अमावस्या और पूर्णिमा कब है?

जुलाई 2026 में: पूर्णिमा: 4 जुलाई 2026 (गुरु पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा)। अमावस्या: 19 जुलाई 2026 (आषाढ़ अमावस्या)। पूर्णिमा व्रत: श्री सत्यनारायण कथा, सत्यनारायण पूजा के लिए पूर्णिमा श्रेष्ठ। अमावस्या: पितृ तर्पण, श्राद्ध और पूर्वजों की आत्मशांति के लिए। चंद्र दर्शन: अमावस्या के बाद दूसरे दिन नए चंद्र दर्शन।

जुलाई 2026 में व्रत-त्योहार का कैलेंडर क्या है?

जुलाई 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर: 4 जुलाई: गुरु पूर्णिमा। 6 जुलाई: मासिक कृष्ण अष्टमी। 10 जुलाई: शुक्र वक्री। 17 जुलाई: देव शयनी एकादशी (व्रत)। 18 जुलाई: राहु-केतु परिवर्तन। 19 जुलाई: अमावस्या। 21 जुलाई: श्रावण प्रारंभ। 24 जुलाई: श्रावण शिवरात्रि (मासिक, विशेष महत्वपूर्ण)। 27 जुलाई: हरियाली तीज। 28 जुलाई: विनायक चतुर्थी।