सितंबर 2026 पंचांग: हिंदू कैलेंडर

हिंदी माह: भाद्रपद-आश्विन | मुख्य: शारदीय नवरात्रि (20 सितंबर), पितृ पक्ष, विजयादशमी/दशहरा, शुक्र मार्गी (6 सितंबर)

तिथित्योहार / कार्यक्रमविशेष
5 सितंबरओणम थिरुवोणम (केरल)केरल का 10 दिवसीय फसल उत्सव
6 सितंबरशुक्र मार्गी (सिंह में)शुक्र वक्री काल समाप्त
4 सितंबरपितृ पक्ष प्रारंभ (महालय)16 दिवसीय पितृ श्राद्ध काल
19 सितंबरसर्व पितृ अमावस्या (महालय)पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन
20 सितंबरशारदीय नवरात्रि प्रारंभ (कलश स्थापना)आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, देवी के 9 रूपों की पूजा
28 सितंबरमहानवमी / सरस्वती पूजा / आयुध पूजानवरात्रि का नौवां दिन
29 सितंबरविजयादशमी / दशहरारावण दहन, शस्त्र पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होती है?

शारदीय नवरात्रि 2026: प्रारंभ: 20 सितंबर 2026 (रविवार), आश्विन शुक्ल प्रतिपदा। कलश स्थापना: 20 सितंबर, प्रातःकाल। 9 देवियां: दिन 1 शैलपुत्री, दिन 2 ब्रह्मचारिणी, दिन 3 चंद्रघंटा, दिन 4 कूष्मांडा, दिन 5 स्कंदमाता, दिन 6 कात्यायनी, दिन 7 कालरात्रि, दिन 8 महागौरी। दिन 9 (28 सितंबर): महानवमी, सिद्धिदात्री। दशहरा: 29-30 सितंबर।

पितृ पक्ष 2026 कब है?

पितृ पक्ष 2026 (महालय): प्रारंभ: 4 सितंबर 2026। समाप्ति: 19 सितंबर 2026 (सर्व पितृ अमावस्या)। 16 दिनों में पूर्वजों का श्राद्ध किया जाता है। सर्वपितृ अमावस्या: 19 सितंबर 2026 (सबसे महत्वपूर्ण, सभी पितरों का श्राद्ध)। गया और हरिद्वार में पितृ श्राद्ध विशेष।

दशहरा 2026 कब है?

विजयादशमी / दशहरा 2026: 29-30 सितंबर 2026 (आश्विन शुक्ल दशमी)। 29 सितंबर: दशमी तिथि दोपहर में, शस्त्र पूजा और शमी पूजन। 30 सितंबर: रावण दहन (अधिकांश स्थानों पर)। रामलीला: उत्तर भारत में 9 दिन की रामलीला का समापन। मैसूर दशहरा: दक्षिण भारत का प्रसिद्ध उत्सव।

शुक्र मार्गी होने के बाद सितंबर 2026 में क्या करें?

शुक्र 6 सितंबर 2026 को मार्गी होगा। इसके बाद: विवाह की बातचीत और एंगेजमेंट शुरू करें। वाहन और सोने-चांदी की खरीद पुनः शुभ। सौंदर्य और फैशन व्यवसाय में नई शुरुआत। सितंबर 6-19 (पितृ पक्ष से पहले): इस अल्प विंडो में खरीदारी शुभ। नवरात्रि (20 सितंबर) से: नई शुरुआत, नए कार्य, नई योजनाओं का शुभारंभ।

सरस्वती पूजा 2026 कब है?

सरस्वती पूजा 2026: 28 सितंबर 2026 (सोमवार), महानवमी (भाद्रपद शुक्ल नवमी)। इस दिन: विद्यार्थी अपनी पुस्तकें और कलम देवी सरस्वती के चरणों में रखते हैं। कारीगर अपने औजारों की पूजा करते हैं (आयुध पूजा)। विजयादशमी (29 सितंबर): पुस्तकें और औजार देवी के आशीर्वाद के बाद वापस लेते हैं।

पितृ पक्ष में क्या खाना चाहिए?

पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) में आहार: खाएं: खीर, पुए, खिचड़ी, जौ की रोटी, चावल, तिल और घी से बने भोजन। पितरों को पसंद: खीर (चावल और दूध), जल, काले तिल, जौ। बचें: मांस, मछली, प्याज, लहसुन। व्रत: एकादशी और अमावस्या को उपवास। श्राद्ध विधि: दक्षिण दिशा में मुख करके तर्पण दें। कौए को भोजन कराएं (पितरों का प्रतीक)।

नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन कब करें?

कन्या पूजन 2026: अष्टमी: 27 सितंबर 2026 या महानवमी: 28 सितंबर 2026। नवरात्रि के अंतिम 2 दिनों में 9 कन्याओं (9 देवियों का प्रतीक) को भोजन कराया जाता है। कन्याओं की आयु: 1 से 10 वर्ष। भोजन: पूड़ी, हलवा, चने, काले तिल। उपहार: वस्त्र, दक्षिणा। कन्या भोज के बाद नवरात्रि का व्रत खोलें।

सर्व पितृ अमावस्या 2026 पर क्या करें?

सर्व पितृ अमावस्या 2026: 19 सितंबर 2026 (शनिवार)। यह पितृ पक्ष का सबसे महत्वपूर्ण दिन है जब सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। विधि: प्रातः पवित्र नदी में स्नान। दक्षिण दिशा में मुख करके तर्पण दें। ब्राह्मण भोज (यदि संभव हो)। गाय, कुत्ते, कौए, और चींटी को भोजन देना। तिल, जौ, और काले तिल जल में मिलाकर तर्पण।

सितंबर 2026 में पंचांग शुद्धि के लिए क्या देखें?

सितंबर 2026 पंचांग की प्रमुख बातें: शुक्र मार्गी: 6 सितंबर से शुभ कार्य पुनः शुरू। राहु काल: प्रतिदिन राहु काल में शुभ कार्य वर्जित। पितृ पक्ष (4-19 सितंबर): नई खरीद, नई शुरुआत से बचें। नवरात्रि (20-28 सितंबर): शक्ति पूजा का श्रेष्ठ काल। विजयादशमी (29-30): स्वयंसिद्ध मुहूर्त, नए कार्यों का शुभारंभ।